बरसात में जब बिजली कर्मचारी निभाते हैं फर्ज, तो उनके परिवार रहते हैं बैचैन ।

नसीमखान सांची
बिजली आज के युग में मानवीय जीवन की एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है, लेकिन बरसात के मौसम में आंधी-तूफान और बिजली की गड़गड़ाहट से यह व्यवस्था अक्सर लड़खड़ा जाती है। ऐसे समय में बिजली कर्मचारियों की जिम्मेदारियाँ और बढ़ जाती हैं।
जब आम उपभोक्ता घरों में बिजली के इंतजार में बैठे होते हैं, तब ये कर्मचारी जान जोखिम में डालकर बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुट जाते हैं। बारिश, अंधेरा, फिसलन, कीड़े-मकोड़े—इन सबकी परवाह किए बिना यह कर्मवीर अपने फर्ज को प्राथमिकता देते हैं।
इनकी यही निष्ठा है कि बारिश हो या तूफान, किसी भी हाल में बिजली व्यवस्था को फिर से सुचारु करने का हरसंभव प्रयास किया जाता है। लेकिन दूसरी ओर, इन कर्मचारियों के परिवार तब तक चिंता में डूबे रहते हैं जब तक ये अपने कर्तव्य को निभाकर सकुशल घर नहीं लौट आते।
जरूरत है उपभोक्ताओं के सहयोग की
बिजली व्यवस्था बाधित होने पर उपभोक्ताओं को असुविधा जरूर होती है, लेकिन ऐसे समय में उन्हें संयम बरतते हुए बिजली कर्मचारियों के कार्य में सहयोग करना चाहिए। कई बार ऐसी घटनाएं भी हो जाती हैं जिनमें कर्मचारी दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं, जिससे उनके परिवारों पर संकट आ खड़ा होता है।
मंडल अधिकारी की अपील
मंडल बिजली अधिकारी ने बताया कि—

“हम पूरी कोशिश करते हैं कि बिजली व्यवस्था जल्द से जल्द बहाल हो, लेकिन खराब मौसम में इसमें कुछ विलंब संभव है। उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि वे संयम रखें और किसी भी स्थिति में बिजली लाइन या खंभों से छेड़छाड़ न करें। विशेष रूप से बच्चों को खंभों के पास न जाने दें।”
उन्होंने आगे कहा कि बरसात के दौरान कई बार बिजली के खंभों में करंट उतर सकता है या तार टूटकर गिर सकते हैं, जिससे जान का खतरा हो सकता है। ऐसी स्थिति में लोगों को चाहिए कि वे तुरंत बिजली विभाग को सूचित करें और क्षतिग्रस्त तारों या खंभों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
सावधानी ही सुरक्षा है
बरसात में बिजली से जुड़ी दुर्घटनाओं से बचने के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
टूटे तारों से दूर रहें।
गीले हाथों से स्विच या उपकरण न छुएं।
बिजली खंभों के पास बच्चों को न जाने दें।
किसी भी आपात स्थिति में तुरंत बिजली विभाग को सूचित करें।
बिजली कर्मचारी भी हमारे समाज का हिस्सा हैं और उनके कार्य की सराहना के साथ-साथ सहयोग और समझदारी भी जरूरी है। यही जागरूकता हमें सुरक्षित और जिम्मेदार समाज की ओर ले जाती है।

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