तालाब गहरीकरण के नाम पर मिट्टी बेचने का आरोप, नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापनग्रामीणों ने सीसी रोड क्षतिग्रस्त होने और मिलीभगत से अवैध मिट्टी बिक्री का लगाया आरोप

नसीमखान सांची
सांची,,,नगर के पुरनिया तालाब के गहरीकरण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने ठेकेदार पर तालाब की मिट्टी बेचने तथा भारी डंपरों के आवागमन से सीसी रोड को क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगाते हुए नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब गहरीकरण के नाम पर निकाली जा रही मिट्टी को ईंट भट्ठों पर बेचा जा रहा है। इसके लिए लगातार भारी डंपरों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे हाल ही में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित सीसी रोड बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकती है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस पूरे मामले में ठेकेदार और नगर परिषद अध्यक्ष की मिलीभगत है। ग्रामीणों ने बताया कि नगर परिषद सीएमओ को भी मौखिक रूप से शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि तालाब क्षेत्र एवं वार्ड क्रमांक-7 में अतिक्रमण किया गया है। ज्ञापन में यह उल्लेख किया गया कि तालाब के समीप स्थित नमो वाटिका का शुभारंभ केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan द्वारा किया गया था, लेकिन वर्तमान में तालाब क्षेत्र में अव्यवस्थाएं बढ़ती जा रही हैं।
ज्ञापन सौंपने वालों में महेंद्र, जीवन, अनिकेत, गौरव राजपूत, विनोद सिंह, जितेंद्र, राधे विश्वकर्मा सहित अन्य ग्रामीण शामिल रहे।
अध्यक्ष ने आरोपों को बताया निराधार
नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि तालाब मछली पालन के लिए महिला समूह को 10 वर्ष के लिए आवंटित किया गया है। तालाब परिसर में बनाया गया कमरा महिला समूह द्वारा मछली पालन से संबंधित सामग्री रखने हेतु अनुमति लेकर बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि वार्ड क्रमांक-7 स्थित श्मशान भूमि को हराभरा रखने के उद्देश्य से पौधरोपण कराया गया है तथा उसकी देखरेख के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति भी की गई है। साथ ही अंतिम संस्कार हेतु लकड़ी की व्यवस्था भी वहां उपलब्ध कराई गई है। अध्यक्ष ने कहा कि लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
तालाब गहरीकरण को लेकर उठे आरोपों ने नगर में विकास कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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