नसीम खान सांची
सांची,,,विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं पर्यटन नगरी सांची में विकास कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। नगर परिषद में लंबे समय से उपयंत्री (सब इंजीनियर) का पद रिक्त होने के कारण निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार चर्चाएं तेज हो रही हैं।
नगर की ऐतिहासिक पहचान और पर्यटन महत्व को देखते हुए शासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर विकास, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इन दावों से मेल खाते नजर नहीं आते। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नगर में अपेक्षित विकास दिखाई नहीं दे रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर को जिस स्तर का स्वरूप मिलना चाहिए था, वह आज तक नहीं मिल सका। स्वच्छता अभियान केवल औपचारिकताओं और फोटो सेशन तक सीमित नजर आता है। वहीं सौंदर्यीकरण के नाम पर कई स्थानों पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन उनकी स्थिति अब बदहाल हो चुकी है। स्टेशन रोड पर लगाए गए फुटपाथ लैंप पूरी तरह क्षतिग्रस्त पड़े हैं, जबकि तालाब सौंदर्यीकरण सहित अन्य कार्यों की भी नियमित देखरेख नहीं हो पा रही है।
नगर में छोटे व्यापारियों और फुटपाथ व्यवसायियों के लिए भी स्थायी व्यवस्था नहीं बन सकी है। ऐसे में रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों पर अतिक्रमण कार्रवाई का खतरा हमेशा मंडराता रहता है।
सबसे बड़ा सवाल नगर परिषद में लंबे समय से उपयंत्री के अभाव को लेकर उठ रहा है। स्थानीय चर्चाओं के अनुसार करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य बिना तकनीकी निगरानी के संचालित हो रहे हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी परीक्षण और भुगतान प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
नगरवासियों का मानना है कि ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाली सांची को योजनाबद्ध विकास, बेहतर स्वच्छता और मजबूत तकनीकी व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि नगर की वास्तविक तस्वीर बदल सके।
ऐतिहासिक पहचान रखने वाली सांची में विकास के दावों के बीच तकनीकी अमले की कमी अब बड़ा सवाल बनती जा रही है।





