नसीम खान सांची
सांची,,,
विश्व प्रसिद्ध बौद्ध धरोहर और पर्यटन नगरी सांची, जो वर्षभर देश-विदेश के हजारों पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार रहती है, इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में आकर लगभग सूनी नजर आ रही है। लगातार बढ़ते तापमान ने न केवल पर्यटकों की आवाजाही को प्रभावित किया है, बल्कि इससे स्थानीय व्यवसाय और रोजगार भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
सांची की पहचान यहां स्थित लगभग ढाई हजार वर्ष पुरानी बौद्ध पुरासंपदा, भव्य स्तूपों और ऐतिहासिक स्मारकों से है। विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त यह स्थल भारतीय इतिहास, संस्कृति और बौद्ध सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां स्थित प्राचीन स्तूप, मंदिर, विहार तथा पुरातत्व संग्रहालय देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
संग्रहालय में भगवान बुद्ध और सम्राट अशोक के काल से जुड़ी अनेक दुर्लभ पुरावस्तुएं संरक्षित हैं। वहीं संग्रहालय परिसर में स्थित ऐतिहासिक ‘मार्शल हाउस’ भी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। इसी स्थान से पुरातत्वविदों ने बिखरी हुई प्राचीन धरोहरों को एकत्रित कर उनके संरक्षण और पुनर्स्थापन का कार्य प्रारंभ किया था।
सामान्य दिनों में पर्यटकों की भीड़ से गुलजार रहने वाला स्तूप परिसर इन दिनों वीरान दिखाई दे रहा है। भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण पर्यटक संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। दोपहर के समय परिसर में सन्नाटा पसरा रहता है और इक्का-दुक्का पर्यटक ही नजर आते हैं।
पर्यटकों की कमी का सीधा असर उन लोगों पर पड़ा है जिनकी आजीविका पर्यटन पर निर्भर है। स्तूप परिसर तक पर्यटकों को लाने-ले जाने वाले छोटे वाहन संचालकों, खाद्य सामग्री विक्रेताओं, स्मृति-चिन्ह बेचने वाले दुकानदारों तथा अन्य छोटे व्यवसायियों की आय में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कई परिवारों के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना भी चुनौती बन गया है।
स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि वे तापमान में कमी आने और पर्यटकों की संख्या बढ़ने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उनका मानना है कि मौसम में राहत मिलने के बाद ही पर्यटन गतिविधियां पुनः गति पकड़ेंगी और उनका रोजगार पटरी पर लौट सकेगा।
सांची की ऐतिहासिक धरोहर आज भी पर्यटकों का स्वागत करने को तैयार है, लेकिन भीषण गर्मी ने फिलहाल इसकी रौनक पर विराम लगा दिया है।





