नसीम खान सांची
सांची,,,
सरकारें भले ही किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान के दावे करती हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। क्षेत्र के अनेक किसान फसल की तुलाई के बाद भी भुगतान के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच किसान अपनी ही मेहनत की कमाई पाने के लिए बैंक और संबंधित कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
जानकारी के अनुसार किसान पूरे वर्ष कठिन परिश्रम कर फसल तैयार करता है। खेती में खाद, बीज, सिंचाई, कीटनाशक दवाओं और मजदूरी पर भारी खर्च करने के बाद वह उम्मीद करता है कि फसल बिकने पर उसे समय पर भुगतान मिलेगा, जिससे वह अपनी देनदारियों का निपटारा कर सके। लेकिन कई किसानों को तुलाई के बाद भी भुगतान नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।
किसानों का कहना है कि पहले उन्हें तुलाई के लिए लंबी कतारों और इंतजार का सामना करना पड़ता है। किसी तरह फसल की तुलाई पूरी होने के बाद भुगतान मिलने की उम्मीद बंधती है, लेकिन राशि खाते में न आने से उनकी चिंताएं और बढ़ जाती हैं। स्थिति यह है कि सहकारी समितियों से लिया गया ऋण तो भुगतान प्रक्रिया के दौरान समायोजित हो जाता है, लेकिन किसानों के हाथ में अपनी जरूरतों और निजी देनदारियों के लिए पर्याप्त राशि समय पर नहीं पहुंच पाती।
क्षेत्र के किसान हरप्रसाद ने बताया कि उन्होंने बड़ी मेहनत से फसल तैयार की और कई दिनों की मशक्कत के बाद सरकारी खरीदी केंद्र पर अपनी उपज बेची। उनकी फसल की तुलाई 4 मई को हो गई थी, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि लगभग 1 लाख 2 हजार 812 रुपये की राशि का भुगतान लंबित है। बैंक जाने पर उन्हें केवल यही जवाब मिलता है कि “ऊपर से राशि प्राप्त नहीं हुई है।”
हरप्रसाद का कहना है कि भुगतान मिलते ही वे खाद, बीज, कीटनाशक दवाओं तथा अन्य देनदारियों का भुगतान कर सकेंगे, लेकिन राशि के अभाव में आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यही स्थिति क्षेत्र के अनेक किसानों की बताई जा रही है, जो अपनी उपज का मूल्य मिलने की राह देख रहे हैं।इतना ही नहीं किसान भुगतान के चक्कर में अपनी आने वाली फसलों की तैयारी न करने में भी पिछडने से चितिंत हो रहा है।
किसानों का आरोप है कि समय पर भुगतान नहीं होने से उन्हें अनावश्यक परेशानी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में किसानों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि खरीदी गई उपज का भुगतान शीघ्र कराया जाए, ताकि अन्नदाता को अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए भटकना न पड़े।
जब फसल की तुलाई समय पर हो सकती है, तो फिर भुगतान में देरी क्यों? यही सवाल आज भीषण गर्मी में भटकता किसान शासन-प्रशासन से पूछ रहा है।





