बारिश की दस्तक के साथ फिर शुरू हुई पाइपलाइन खुदाई, दलदल में बदलने लगीं सड़कें।जल संवर्धन योजना के कार्यों पर उठे सवाल, बरसात में खुदाई से राहगीरों और वाहन चालकों की बढ़ी परेशानी।

नसीमखान सांची
सांची,,नगर में पेयजल संवर्धन योजना के तहत चल रहे कार्य एक बार फिर लोगों की परेशानी का कारण बनते दिखाई दे रहे हैं। जैसे ही मानसून ने दस्तक दी है, पाइपलाइन जांच और मरम्मत के नाम पर सड़कों की खुदाई शुरू कर दी गई है। इससे कई स्थानों पर सड़कें दलदल में तब्दील होने लगी हैं और आम नागरिकों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार शासन की जल संवर्धन योजना के अंतर्गत पिछले लगभग छह वर्षों से नगर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए कार्य किया जा रहा है। इस योजना का संचालन अर्बन डेवलपमेंट कंपनी द्वारा किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नगरवासियों को पेयजल संकट से स्थायी राहत दिलाना है। हालांकि लंबे समय बीत जाने के बावजूद योजना अब तक पूर्ण रूप से मूर्त रूप नहीं ले सकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश शुरू होते ही कंपनी को पाइपलाइन की जांच और खुदाई की याद आती है। परिणामस्वरूप पक्की सड़कों को खोद दिया जाता है, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। खुदाई से निकली मिट्टी बारिश के पानी के साथ मिलकर फिसलन का रूप ले लेती है, जिससे वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
नगरवासियों का आरोप है कि गर्मी के दिनों में जब पूरा नगर पेयजल संकट से जूझ रहा था और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान थे, तब संबंधित एजेंसी की सक्रियता दिखाई नहीं दी। लेकिन बारिश शुरू होते ही फिर से खुदाई का कार्य प्रारंभ कर दिया गया, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं।
सांची विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी है, जहां प्रतिदिन देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में सड़कों की बदहाल स्थिति और जगह-जगह खुदाई के दृश्य न केवल स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं, बल्कि नगर की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
नगरवासियों ने मांग की है कि पाइपलाइन संबंधी कार्यों की उचित योजना बनाकर उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि बरसात के मौसम में सड़कों को अनावश्यक रूप से क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सके और आमजन को राहत मिल सके।
यदि बरसात के बीच इसी तरह सड़कों की खुदाई जारी रही, तो पेयजल व्यवस्था में सुधार से पहले नागरिकों को आवागमन की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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