नसीमखान सांची
सांची,,, नगर परिषद क्षेत्र में वर्षों से फैले अतिक्रमण के विरुद्ध अब सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। नगर परिषद अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अतिक्रमण हटाने, जल निकासी व्यवस्था सुधारने तथा विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। बैठक में नगर के सभी 12 वार्डों में फैले अवैध कब्जों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र के लगभग सभी 12 वार्डों में सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है। परिषद के प्रारंभिक सर्वे में बिना अनुमति एवं बिना वैध दस्तावेजों के निर्मित लगभग 400 भवन चिन्हित किए गए हैं। नगर का पठार क्षेत्र भी अतिक्रमण की चपेट में बताया जा रहा है। परिषद ने ऐसे सभी निर्माणों का चिन्हांकन कर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
बैठक में नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम ने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नगर की समस्याओं के निराकरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने का अभियान पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ चलाया जाएगा तथा सरकारी भूमि को हर हाल में अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा, ताकि भविष्य में वहां जनहित के विकास कार्य किए जा सकें।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि चिन्हित अतिक्रमणों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नगर परिषद का अतिक्रमण दस्ता, पुलिस एवं राजस्व विभाग के संयुक्त सहयोग से अभियान चलाएगा। रिक्त सरकारी भूमि पर किए गए कब्जों के साथ-साथ बिना अनुमति निर्मित भवनों पर भी कार्रवाई प्रस्तावित है। संबंधित लोगों को पहले नोटिस जारी किए जाएंगे। निर्धारित समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाने पर परिषद स्वयं कार्रवाई करेगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
इनका कहना है—
“अतिक्रमण हटाने के लिए नगर परिषद का दस्ता तैयार कर लिया गया है। राजस्व एवं पुलिस विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई की जाएगी। चिन्हित अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। सात दिवस के भीतर यदि वे स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाया जाएगा।”
– रामलाल कुशवाहा, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, सांची
नगर परिषद की इस पहल पर अब नगरवासियों की नजरें टिकी हैं। यदि कार्रवाई निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के होती है, तो वर्षों से सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध कब्जों पर प्रभावी अंकुश लग सकता है।





