विदिशा में स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डाल रहे थे बच्चे: एक वायरल वीडियो जिसने प्रशासन और हाईकोर्ट को हिला दिया

रिपोर्ट: नाजिर अली | Live Khabar India
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले का एक छोटा सा गांव अचानक पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया। वजह थी एक ऐसा वीडियो जिसने शिक्षा व्यवस्था, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यह वीडियो था विदिशा के ग्राम ककरुआ और पलोंह के बीच बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम का, जहां स्कूली बच्चे रोजाना स्कूल पहुंचने के लिए मौत को मात देने जैसा जोखिम उठा रहे थे।

वीडियो में दिखाई दिया कि बच्चे डैम के संकरे पिलरों पर एक के बाद एक छलांग लगाते हुए नदी पार कर रहे हैं। एक छोटी सी चूक उन्हें सीधे पानी में गिरा सकती थी। लेकिन शिक्षा पाने की जिद और मजबूरी ने इन बच्चों को इस खतरनाक रास्ते का आदी बना दिया था।

कैसे सामने आया मामला?

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म पहने बच्चे बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के ऊपर से गुजरते दिखाई दे रहे थे। रास्ता इतना खतरनाक था कि हर कदम पर हादसे का खतरा नजर आ रहा था।

जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते बच्चे

वीडियो सामने आते ही लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया। आखिर बच्चों को स्कूल जाने के लिए इतना बड़ा जोखिम क्यों उठाना पड़ रहा है? क्या गांव में कोई सुरक्षित मार्ग उपलब्ध नहीं है? क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी? या फिर जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई?

देखते ही देखते यह मुद्दा सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया।

शिक्षा का अधिकार या जोखिम भरा सफर?

देश में शिक्षा के अधिकार को लेकर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन ककरुआ और पलोंह के बच्चों की तस्वीर इन दावों की हकीकत दिखा रही थी।

ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से बच्चे इसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। बरसात के मौसम में खतरा और बढ़ जाता है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसके बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

बच्चों और अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि शिक्षा भी जरूरी है और सुरक्षित रास्ता भी नहीं है। ऐसे में मजबूरी में बच्चों को डैम के ऊपर से होकर गुजरना पड़ता था।

बेरीकेट्स लगे

वायरल वीडियो ने जगाई व्यवस्था

वीडियो वायरल होने के बाद पूरे प्रदेश का ध्यान इस समस्या की ओर गया। सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया तो कई ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए।

लोगों का कहना था कि अगर किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? क्या प्रशासन किसी दुर्घटना का इंतजार कर रहा था?

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट

हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की और पूछा कि आखिर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप ने इस मामले को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। अब यह केवल एक वायरल वीडियो नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन गया।

प्रशासन हरकत में आया

हाईकोर्ट के संज्ञान और बढ़ते जनदबाव के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और तत्काल कुछ कदम उठाए।

डैम के दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई ताकि लोग सीधे खतरनाक हिस्से में प्रवेश न कर सकें। सुरक्षा के लिहाज से चेतावनी बोर्ड लगाने और निगरानी बढ़ाने की भी पहल की गई।

रेलिंग लगी


हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि बैरिकेडिंग केवल अस्थायी समाधान है। असली जरूरत एक सुरक्षित और स्थायी मार्ग की है ताकि बच्चों को भविष्य में ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।


ग्रामीणों का मानना है कि वायरल वीडियो ने उनकी आवाज को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने का काम किया है। अब उन्हें उम्मीद है कि इस बार कोई स्थायी समाधान निकलेगा।

बड़ा सवाल: क्या ग्रामीण बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता है?

यह मामला केवल ककरुआ और पलोंह गांव का नहीं है। यह उन सैकड़ों ग्रामीण क्षेत्रों की कहानी है जहां बच्चे आज भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए कठिन और जोखिम भरे रास्तों से गुजरते हैं।

सरकारें शिक्षा के आंकड़े गिनाती हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या स्कूल तक सुरक्षित पहुंच भी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं होनी चाहिए? यदि बच्चों को स्कूल जाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़े तो विकास और शिक्षा के दावे अधूरे नजर आते हैं।

अब आगे क्या?

हाईकोर्ट की निगरानी में प्रशासन को पूरे मामले की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। ग्रामीणों और अभिभावकों की उम्मीद है कि केवल बैरिकेडिंग तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान निकाला जाएगा।

फिलहाल ककरुआ और पलोंह के बीच बेतवा डैम पर बच्चों के खतरनाक सफर ने पूरे प्रदेश को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि शिक्षा का रास्ता आखिर इतना जोखिम भरा क्यों होना चाहिए।

Live khabar india

Related Posts

फोरलेन सड़क को लेकर सांची में असमंजस बरकरार, वायरल पत्रों से बढ़ी बेचैनी

नसीम खान सांची,,,ऐतिहासिक नगर सांची से गुजरने वाले भोपाल-विदिशा फोरलेन मार्ग (SH-18) को लेकर नगरवासियों में असमंजस और बेचैनी का माहौल बना हुआ है। लोगों को अपनी मेहनत की गाढ़ी…

रतनपुर आंगनवाड़ी केंद्र में हुआ आंगन मिलन सेवा कार्यक्रमविधायक डॉ. चौधरी और जिला पंचायत अध्यक्ष मीणा ने बच्चों व अभिभावकों से किया संवाद

नसीम खानसांची,,, सेवा संकल्प अभियान के तहत सांची जनपद के ग्राम रतनपुर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

फोरलेन सड़क को लेकर सांची में असमंजस बरकरार, वायरल पत्रों से बढ़ी बेचैनी

फोरलेन सड़क को लेकर सांची में असमंजस बरकरार, वायरल पत्रों से बढ़ी बेचैनी

रतनपुर आंगनवाड़ी केंद्र में हुआ आंगन मिलन सेवा कार्यक्रमविधायक डॉ. चौधरी और जिला पंचायत अध्यक्ष मीणा ने बच्चों व अभिभावकों से किया संवाद

रतनपुर आंगनवाड़ी केंद्र में हुआ आंगन मिलन सेवा कार्यक्रमविधायक डॉ. चौधरी और जिला पंचायत अध्यक्ष मीणा ने बच्चों व अभिभावकों से किया संवाद

सांची विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विमलेन्द्र कुमार ने किया सतधारा स्तूप और जम्बूद्वीप पार्क का भ्रमण

सांची विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विमलेन्द्र कुमार ने किया सतधारा स्तूप और जम्बूद्वीप पार्क का भ्रमण

वार्ड-13 में सीसी रोड का भूमि पूजन

वार्ड-13 में सीसी रोड का भूमि पूजन

गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आना के जयकारों के साथ गणपति को दी विदाईगणेशोत्सव के अंतिम दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद हुआ प्रतिमाओं का विसर्जन, बैंड-बाजे और आतिशबाजी के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह

गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आना के जयकारों के साथ गणपति को दी विदाईगणेशोत्सव के अंतिम दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद हुआ प्रतिमाओं का विसर्जन, बैंड-बाजे और आतिशबाजी के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह

सांची कृषक सेवा सहकारी समिति की वार्षिक आमसभा संपन्न, बड़ी संख्या में किसानों ने लिया भाग

सांची कृषक सेवा सहकारी समिति की वार्षिक आमसभा संपन्न, बड़ी संख्या में किसानों ने लिया भाग