वसीम कुरैशी रिपोर्टर
रायसेन।प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना कि दो किश्तें जारी हो चुकी हैं। दोनों बार एक-एक हजार रुपये महिलाओं के खाते में डाले गए हैं। जिले में दो लाख से ज्यादा महिलाएं योजना के तहत फायदा ले रही हैं। महिलाएं अलग-अलग तरीके से इसका उपयोग कर रही है। कोई घर के लिए बर्तन खरीद रही है, तो कोई अपने बच्चों के लिए स्कूल बैग लेकर इस राशि का उपयोग कर रही हैं।
रायसेन की रहने वाली लाडली बहना आरती सोनू साहू ने बताया कि “जब हम गांव से शहर में रहने आये तो नई गृहस्थी जमाने में बहुत सारे पैसों औ सामान की आवश्यकता होती है. मुझे भी मेरी रसोई के लिये सामान की आवश्यकता थी। जैसे ही लाड़ली बहना योजना के एक हजार रुपये मेरे खाते में मुझे प्राप्त हुये, तो मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। मैंने अपने खाते से रुपये निकाले और रसोई के लिये बर्तन ले आई। योजना से संबंधित दूसरी किस्त के एक हजार रूपये मिलने से मैंने नये घर के लिये जरुरत और भी सामान खरीदे हैं।”
बच्चों के लिए बैग खरीदे….
इसी तरह, बमोरी के ज्योति सेन,प्रीति यादव को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की राशि जून महीने से मिली है। प्रीति यादव के पति चौराहे पर चाय का ठेला लगाते हैं। जिससे घर खर्च एवं जीवन यापन के अच्छे से नहीं हो पाता था। प्रीति की दो संतान हैं। प्रीति यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत उनको जो राशि प्राप्त हुई उससे वह अपने बच्चों के लिए स्कूल बैग खरीद कर लाईं।कुछ इस तरह ही ज्योति सेन का कहना था।
पिछले साल किसी कारणवश वह बच्चों के लिए स्कूल बैग खरीद नहीं पाई थी, जिसका उनको दुःख था। परंतु इस साल ”लाड़ली बहना योजना” के द्वारा मिले एक हजार रूपये से बच्चों के लिए स्कूल बैग खरीद पाई। बाकी बचे पैसे से खुद के लिए चूड़ी़ भी खरीदी। अगले महीने जैसे ही पैसे आएंगे वह उससे अन्य घर के जरूरत का सामान लेकर आयेंगी। वह इस योजना के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को धन्यवाद देती हैं।
प्रीति धाकड़ ने अपने बच्चों के लिए बैग खरीदे….
प्रीति धाकड़ पूजा कुशवाह बने अपने बच्चों के लिए बैग खरीदे।
बेटी को दिलाये कपड़े और खिलौने।
लाड़ली बहना प्रियंका पत्नी मिथुन प्रजापति ने बताया कि ” मेरी बेटी का जन्म दो महीने पहले हुआ है। मैं चाहती थी कि मेरी बेटी भी और बच्चों की तरह अच्छे कपडे़ पहने और अच्छे खिलौनों से खेलें। मेरे पति और मैं मजदूरी करते हैं। हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि हम बच्ची को नये कपडे़ और खिलौने खरीद सकें। किन्तु जैसे ही मेरे खाते में ‘’मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’’ के एक हजार रुपये आए, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैं अपनी बच्ची के लिये नए खिलौने और कपड़े ले आई। आज मेरी बेटी और मैं और मेरा पूरा परिवार खुश है, क्योंकि मैंने जो भी अपनी बेटी के लिए सोचा था। वह आज पूरा हुआ।”
नसीम खान संपादक






