जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
प्रदेश रिपोर्टर,दिलेश्वर चौहान
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक सांस्कृतिक तथा विभिन्न अवसरों पर त्योहारों पर आदिवासियों द्वारा किए जाने वाले पारंपरिक लोक नृत्य ,लोकगीत, लोकनाट्य ,आदि की पहचान स्थापित करने के उद्देश्य बस्तर पंडुम, का आयोजन किया जा रहा है इसके तहत जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन कहां के शहर से लगे ग्राम सिंगार भाट के गोंडवाना भवन में धूमधाम पूर्वक किया गया जिसमें जिले के सभी साथ विकास खंडो से आई लोक कलाकारों ने विभिन्न विधाओं में अपनी शानदार प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ की बस्तर जिले में आदिवासी परंपरा रहन-सहन खान-पान च देवी देवताओं की पूजा रीति रिवाज बोली भाखा छत्तीसगढ़ में एक विशेष पहचान रखता है यहां दूर-दूर से सैलानी आते हैं और बस्तर को समझने की कोशिश करते हैं यहां के मनभावन मोह दृश्य को देखकर मन मुग्ध हो जाता है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ की खास पांडूम के जरिए अपनी परंपरा को प्रदर्शित करते हैं।






