बिजली व्यवस्था ध्वस्त, प्रशासन मौनसांची में अंधेरे का साम्राज्य, पर्यटन और विकास दोनों पर संकट।

नसीमखान सांची

सांची,,, विश्व धरोहर के रूप में पहचाने जाने वाला यह नगर आज बिजली अव्यवस्था के अंधकार में डूबा हुआ है। यहां बिजली कब जाएगी और कब आएगी, इसका किसी को अंदाज़ा तक नहीं रहता। नगर के लोग और यहां आने वाले पर्यटक हर दिन इस बदइंतज़ामी का दंश झेल रहे हैं।
जानकारी के अनुसार पूरे नगर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो चुकी है। सरकार और प्रशासन जहां सांची को स्वच्छ और आकर्षक बनाकर अधिक से अधिक पर्यटकों को लुभाने की बातें करते हैं, वहीं हकीकत यह है कि नगर की रोशनी छीनने वाली अव्यवस्थित बिजली व्यवस्था पर किसी की नज़र नहीं जाती।
बिजली व्यवस्था सुधारने का जिम्मा उठाने वाली कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लाखों-करोड़ों खर्च करने के बाद भी हालात जस के तस हैं। जगह-जगह बिछाई गई केवल आए दिन धधक उठती हैं, जिससे आग लगने का खतरा मंडराता रहता है। लोगों में भय व्याप्त है, पर जिम्मेदारों की लापरवाही कम नहीं हो रही।
वार्ड क्रमांक 3 में नई केवल डाली गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक वार्ड की मरम्मत से पूरे नगर की बिजली समस्या खत्म हो जाएगी? बाकी वार्डवासी तो अब भी अंधेरे में ही कैद हैं।
राजमार्ग पर भी बदइंतज़ामी का बोलबाला।
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण एजेंसी ने सड़क किनारे रोशनी का जिम्मा लिया था। पोल खड़े किए गए, अंडरग्राउंड केवल डाली गईं। लेकिन इनकी घटिया गुणवत्ता जल्द ही सामने आ गई। पोल आड़े-तिरछे होकर टूटने की कगार पर हैं, जगह-जगह केवल के टुकड़े बिखरे पड़े हैं और लाइटें फ्यूज़ होकर नगर को अंधेरे की गिरफ्त में धकेल चुकी हैं।
सरकार और विभाग इस पर करोड़ों रुपये खर्च कर चुके हैं, लेकिन रखरखाव और निगरानी पर शून्य ध्यान है। जब-जब लोग आवाज़ उठाते हैं, अधिकारी और कर्मचारी कुछ दिन रस्मअदायगी करते हैं, फिर सबकुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है।
बड़ा सवाल।
क्या सांची जैसे विश्वप्रसिद्ध स्थल पर इस तरह की बिजली अव्यवस्था जारी रहेगी? क्या पर्यटन और विकास केवल कागज़ी आंकड़े बनकर रह जाएंगे?
लोग अब प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि सांची अंधेरे से निकलकर सचमुच रोशन हो सके।

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