नसीम खान
सांची,,,विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं पर्यटन नगरी सांची इन दिनों वन्य प्राणियों की दस्तक से दहशत में है। क्षेत्र में लंबे समय से तेंदुए के दिखाई देने की सूचनाएं सामने आ रही हैं, वहीं आबादी क्षेत्रों में कबर बिज्जुओं का झुंड भी दिखाई देने से लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि वन विभाग द्वारा कार्रवाई किए जाने के बावजूद वन्य प्राणियों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
जानकारी के अनुसार सांची की पहाड़ी का बड़ा क्षेत्र घने पेड़-पौधों से आच्छादित है। यहां तेंदुए की मौजूदगी की सूचना समय-समय पर सामने आती रही है। कुछ दिन पूर्व भी तेंदुए की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था, लेकिन तेंदुआ टीम के हाथ नहीं लगा। उस समय विभागीय अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में चार वनरक्षकों की तैनाती किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि वनरक्षकों की नियमित मौजूदगी दिखाई नहीं देती, जबकि तेंदुए की गतिविधियों की सूचनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
तेंदुए की दस्तक से क्षेत्र के किसान भी चिंतित हैं। किसानों को कृषि कार्य के लिए दिन-रात खेतों पर आना-जाना पड़ता है, ऐसे में जंगली जानवर की मौजूदगी की खबर से उनमें सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बीते दिनों तेंदुए द्वारा कुछ कुत्तों पर हमला किए जाने की बात भी सामने आई थी।
तेंदुए की संभावित मौजूदगी को देखते हुए पुरातत्व विभाग ने भी सुरक्षा की दृष्टि से कदम उठाए हैं। स्तूप क्रमांक-2, जो पहाड़ी के बीच स्थित है, वहां सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। साथ ही एहतियात के तौर पर पर्यटकों के वहां जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
आबादी में पहुंच रहे कबर बिज्जू
दूसरी ओर लंबे समय से कब्रिस्तानों के आसपास रहने वाले कबर बिज्जू भी अब आबादी क्षेत्रों में दिखाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि कबर बिज्जू झुंड के रूप में घरों की छतों और आसपास घूमते दिखाई देते हैं तथा लोगों से भी आसानी से नहीं डरते। इससे खासकर बच्चों में भय बना हुआ है।
पूर्व में भी कबर बिज्जुओं को आबादी क्षेत्र से हटाने के लिए वन विभाग द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया था, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन्य प्राणियों की गतिविधियों पर समय रहते प्रभावी निगरानी नहीं की गई तो भविष्य में किसी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इनका कहना है
स्तूप प्रभारी, सांची ने बताया कि उनके अथवा किसी कर्मचारी द्वारा अभी तक तेंदुआ प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा गया है। बावजूद इसके सुरक्षा की दृष्टि से पूरी सतर्कता बरती जा रही है। इसी आशंका के चलते स्तूप क्रमांक-2 पर सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है तथा पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। मामले की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों और वन विभाग को दी जा चुकी है। वन विभाग की टीम तीन-चार बार स्तूप पहाड़ी पर रेस्क्यू ऑपरेशन भी चला चुकी है, लेकिन तेंदुआ नजर नहीं आया।।
बारहाल जो भी हो वन्य प्राणियों की लगातार दस्तक ने ऐतिहासिक सांची की सुरक्षा व्यवस्था और वन विभाग की निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।





