सांची नगर में आवारा पशुओं का आतंक: राहगीरों और पर्यटकों की सुरक्षा पर संकट

नसीमखान

सांची ,, विश्वप्रसिद्ध बौद्ध स्थल सांची, जहां देश-विदेश से पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है, आजकल आवारा पशुओं के जमावड़े से परेशान है। नगर के हर गली-मोहल्ले, चौराहों और यहां तक कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी पशुओं का कब्जा दिखाई देता है।
यह स्थिति केवल स्थानीय निवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि सांची आने वाले पर्यटकों के लिए भी गंभीर समस्या बन चुकी है। सांडों का आपसी संघर्ष कई बार व्यस्त चौराहों पर लोगों में दहशत फैला देता है। नगर में अब तक कई लोग इन पशुओं के हमले का शिकार हो चुके हैं।
स्थानीय जानकारों के अनुसार, अधिकांश पशु नगर के ही लोगों के पालतू हैं, जिन्हें दूध दोहने के बाद यूं ही सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। कुछ पशु बाहरी क्षेत्रों से भी आकर इस संकट को और बढ़ा देते हैं। तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर ये पशु कई बार दुर्घटना का कारण बनते हैं, लेकिन इनके मालिक सामने नहीं आते। पुलिस और नगर परिषद के कर्मचारियों को ऐसे पशुओं को सड़क से हटाने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
हालांकि, प्रशासन द्वारा पशु मालिकों को कई बार चेतावनी दी गई है, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखाई देता। लाखों रुपए खर्च कर गौशालाएं बनवाने और उन्हें अनुदान देने के बावजूद पशुओं को वहां तक नहीं पहुंचाया जाता। यदि पहुंचते भी हैं तो गौशाला संचालक उन्हें वापस छोड़ देते हैं।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि पहले कच्चे मकानों में पशुओं के लिए स्थान था, परंतु अब पक्के मकानों में उनके लिए जगह नहीं रही। नतीजतन, ये जानवर सड़कों को ही अपना ठिकाना बना लेते हैं। दुकानों पर मुंह मारना, ट्रैफिक में बाधा डालना और कभी-कभी मौत के मुंह में समा जाना आम बात हो गई है।
प्रशासन की निष्क्रियता और पशु मालिकों की लापरवाही ने सांची को एक गंभीर संकट की ओर धकेल दिया है। अब समय आ गया है कि इस पर ठोस और कठोर कदम उठाए जाएं, ताकि आमजन और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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