सांची: जहाँ विरासत और स्वाद का अद्भुत संगम होता हैप्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहर और स्वादिष्ट फलों से समृद्ध एक अनोखा नगर।

नसीमखान सांची

सांची, जो कि विश्वप्रसिद्ध बौद्ध स्मारकों के लिए जानी जाती है, केवल ऐतिहासिक महत्व का केन्द्र नहीं है, बल्कि यह नगर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और स्वादिष्ट फलों के लिए भी खास पहचान रखता है। यहाँ का हरा-भरा वातावरण, विशेषकर आम और खिरनी के वृक्ष, वर्षों से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं।
कभी इस नगर में आम के सैकड़ों पेड़ छाया, शुद्ध ऑक्सीजन और स्वादिष्ट फलों का वरदान थे। यहाँ की आम की विभिन्न प्रजातियाँ न केवल स्थानीय लोगों में लोकप्रिय थीं, बल्कि देशभर से लोग सांची के आम का स्वाद लेने आते रहे हैं। विशिष्ट अतिथि और वरिष्ठ अधिकारी वर्ग तक इस स्वाद के मुरीद रहे हैं।
यहां स्थित एक विशाल शासकीय उद्यान, जो लगभग 11 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ था, आम और खिरनी के पेड़ों से समृद्ध था। हालांकि, हाल ही में पर्यटन विभाग ने इस उद्यान के आधे हिस्से को ‘नगर सौंदर्यीकरण’ के नाम पर अधिग्रहित कर ‘जम्बूद्वीप पार्क’ के रूप में विकसित कर दिया। करोड़ों की लागत से बने इस पार्क ने पर्यटकों को नया आकर्षण तो दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में कई पेड़ काटे गए और प्राकृतिक समृद्धि प्रभावित हुई।
शेष आधा भाग अब भी शासकीय उद्यान के अधीन है, जहां आज भी स्वादिष्ट आम और खिरनी के पेड़ फल दे रहे हैं। सांची का आम अब भी देशभर में प्रसिद्ध है, और इन फलों की नीलामी से सरकार को लाखों की आय होती है। खिरनी भी इस क्षेत्र की पहचान बन चुकी है। कभी बड़ी संख्या में खिरनी के पेड़ पूरे नगर में फैले हुए थे, लेकिन बढ़ती आबादी और अतिक्रमण के चलते अब ये केवल स्तूप परिसर तक सीमित रह गए हैं।
स्तूप परिसर की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते वहाँ के खिरनी वृक्ष आज भी सुरक्षित हैं। यही कारण है कि दूर-दराज से लोग खिरनी का स्वाद लेने यहाँ आते हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा खिरनी फलों की नीलामी की जाती है, जिससे विभाग को अच्छी-खासी आमदनी होती है।
सांची आज भी न केवल बौद्ध धर्म की समृद्ध विरासत को संजोए हुए है, बल्कि अपने फलों की मिठास से देशभर के लोगों के दिलों में खास स्थान बनाए हुए है।

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