नसीमखान
सांची,, मोहर्रम के पावन अवसर पर सांची से लगभग चार किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गुलगांव में प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी ताजिया जुलूस, सवारियों का प्रदर्शन और अखाड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर ग्राम में सभी समुदायों के लोगों की सहभागिता देखने को मिली, जिससे सामाजिक सौहार्द और एकता की मिसाल कायम हुई।
गांव में सातवीं मोहर्रम से लेकर ग्यारहवीं मोहर्रम तक यह कार्यक्रम पारंपरिक और गमगीन माहौल में मनाया गया। मुस्लिम समाज में मोहर्रम का महीना शोक और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है, जिसमें हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इस मौके पर निकाले गए ताजिए और सवारियों ने लोगों का ध्यान खींचा। साथ ही आयोजित अखाड़ा कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने अपने करतबों का प्रदर्शन कर उपस्थित जनसमूह को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम के दौरान पूरा गांव मातमी माहौल में डूबा रहा, लेकिन उत्साह और सहभागिता में कोई कमी नहीं थी। इस कार्यक्रम में मुस्लिम समाज के अलावा गांव के जाने माने समाज सेवी 72 वर्षीय गौरीशंकर जैन अहम भूमिका निभाते दिखाई देते है ।
मोहर्रम के इन कार्यक्रमों को देखने के लिए न केवल गुलगांव, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और सांची नगर से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ग्रामवासियों के सहयोग और प्रशासन की सतर्कता के चलते कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस बल की विशेष तैनाती की गई थी, जिससे किसी प्रकार की कोई बाधा उत्पन्न न हो। उल्लेखनीय है कि पूरे क्षेत्र में गुलगांव ही ऐसा प्रमुख ग्राम है, जहाँ मोहर्रम का आयोजन इस स्तर पर पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। यह कार्यक्रम देर रात तक जारी रहता है।
ग्यारहवीं मोहर्रम को ताजियों के विसर्जन के साथ इस धार्मिक आयोजन का समापन होता है।






