नसीमखान
सांची,,
ऐतिहासिक और विश्व विख्यात नगर सांची में इन दिनों मच्छरों की भारी संख्या से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। नगर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता से स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर को विश्व स्तरीय स्वरूप देने की बड़ी-बड़ी घोषणाएँ समय-समय पर सुनने को मिलती हैं, परंतु जमीनी हकीकत इन दावों के ठीक विपरीत नजर आती है। नगर में नागरिक सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन सुविधाएँ सिर्फ कागजों में सीमित रह जाती हैं।
मच्छरों की भरमार, फॉगिंग मशीनें धूल खा रही।
नगरभर में मच्छरों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि देखी जा रही है। पूर्व में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव और फॉगिंग मशीनों का उपयोग नियमित रूप से होता था, परंतु अब न तो छिड़काव किया जा रहा है और न ही फॉगिंग मशीनें चलाई जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि नगर परिषद द्वारा दो बार फॉगिंग मशीन खरीदी गई, लेकिन तकनीशियन के अभाव में उनका उपयोग ही नहीं हो पाया, जिससे नागरिक मलेरिया, डेंगू और अन्य बीमारियों के डर से जीने को मजबूर हैं।
बारिश ने खोल दी व्यवस्थाओं की पोल।
हर वर्ष बारिश से पूर्व नगर में तैयारियों के दावे किए जाते हैं, परंतु पहली बारिश में ही सड़कों की हालत खराब हो जाती है। कई मोहल्लों में जलनिकासी की व्यवस्था न होने से दलदल जैसी स्थिति बन जाती है। यही नहीं, नगर की प्रकाश व्यवस्था भी बदहाल है — अनेक क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं।
निर्माण कार्य तकनीशियन के बिना।
नगर में भवन, नालों और सड़कों के निर्माण कार्य तो जारी हैं, परंतु इनकी निगरानी के लिए कोई तकनीकी अधिकारी मौजूद नहीं है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के भरोसे की जा रही है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।
बिजली व्यवस्था भी भगवान भरोसे।
नगर परिषद कार्यालय में बिजली तकनीशियन का अभाव है। बिजली से जुड़े काम भी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के हवाले हैं, जिससे हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। प्रशासन इस ओर भी उदासीन है।
कर्मचारियों की भारी कमी।
कार्यालय में अधिकांश शाखाओं में प्रभारी अधिकारियों की कमी है। स्वीकृत पदों के मुकाबले कर्मियों की संख्या काफी कम है, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। अन्य कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्यभार वहन करना पड़ रहा है।
बेलगाम अतिक्रमण।
नगर परिषद की निष्क्रियता का लाभ उठाकर अतिक्रमणकारियों ने नगर की अनेक शासकीय भूमि पर कब्जा कर लिया है। न तो इन अतिक्रमणों को रोका गया और न ही किसी तरह की कार्रवाई की गई। शासन की भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर नागरिकों में आक्रोश है।
वेतन से कटी सुरक्षा राशि में गड़बड़ी।
नगर परिषद के कर्मचारियों के वेतन से वर्षों से काटी जा रही पीएफ और अन्य सुरक्षा निधियों की राशि में भी गड़बड़ी सामने आई है। कई कर्मचारी अपनी ही राशि के भुगतान के लिए चक्कर काटने को मजबूर हैं।
ऐतिहासिक नगर सांची में नगर परिषद कार्यालय की लचर व्यवस्था, कर्मचारियों की कमी, स्वच्छता की उपेक्षा, तकनीकी कर्मचारियों का अभाव, और मच्छरों की समस्या जैसी गंभीर चुनौतियों से नागरिक जूझ रहे हैं। करोड़ों रुपये की योजनाएं केवल कागजों में रह गई हैं और प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता के चलते नगरवासी सुविधाओं से वंचित हैं।






