नसीमखान
सांची,, क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से जहां किसानों के चेहरे पर खुशी लौटी थी, वहीं अब अचानक मौसम के बदले मिजाज ने फिर चिंता की लकीरें गहरा दी हैं। लगातार बारिश के कारण किसानों ने तेजी से धान फसल की तैयारी शुरू कर दी थी। गड़े बनाए जा चुके थे और रोपाई का कार्य भी शुरू हो गया था, लेकिन तभी बरसात थम गई और तेज धूप ने अपनी दस्तक दे दी।
अब खेतों में नमी तेजी से खत्म हो रही है, जिससे धान की फसल को पानी की सख्त जरूरत महसूस हो रही है। जिन किसानों के पास निजी सिंचाई साधन हैं, वे किसी तरह फसल को बचाने की कोशिश में लगे हैं। वहीं अधिकांश किसान अब भी बारिश के दोबारा लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
कुछ किसानों ने निराशा में आकर इस बार धान की फसल को टालने का फैसला कर लिया है। वहीं जिन्होंने पहले ही रोपाई कर दी है, वे अब पानी की व्यवस्था और मजदूरों की मजदूरी जैसे दोहरे संकट से जूझ रहे हैं। बाहर से बुलाए गए श्रमिकों का खर्च अब किसानों के ऊपर आर्थिक बोझ बन गया है।
किसान कमलकिशोर पटेल ने बताया, “पहले तो लगातार बारिश से राहत मिली थी, हमने रोपाई शुरू कर दी, लेकिन अब पानी की भारी किल्लत है। न तो बारिश हो रही है और न ही कुओं या बोरों में पर्याप्त पानी बचा है। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो पूरी फसल खतरे में पड़ सकती है।”
किसान जीवनसिंह राजपूत का कहना है, “हर साल यही होता है, या तो बहुत ज्यादा बारिश होती है या बिल्कुल नहीं। सरकार को चाहिए कि गांवों में वैकल्पिक सिंचाई साधनों की योजना बनाए ताकि हम सिर्फ मौसम पर निर्भर न रहें।”
किसानों की मांग है कि प्रशासन और कृषि विभाग जल्द से जल्द राहत कार्य प्रारंभ करे और सिंचाई संसाधनों की मदद उपलब्ध कराए, ताकि धान जैसी महत्वपूर्ण फसल पर संकट के बादल न मंडराएं।






