सांची में महाबोधि महोत्सव का भव्य आगाज, दूसरे दिन उमड़ा विशाल जनसैलाब।श्रीलंका की उच्चायुक्त व मंत्रियों की उपस्थिति में हुआ शुभारंभ; आज स्तूपों पर भारी भीड़, शहर में जामकी बनी रही स्थिति।

नसीमखान सांची
सांची,,,
विश्व धरोहर सांची में दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव-2025 और चेतियागिरी विहार के 73वें वार्षिकोत्सव का शुभारंभ शनिवार शाम बुद्ध जम्बूद्वीप पार्क में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में श्रीलंका की उच्चायुक्त महामहिम महिशिनी कॉलोन, प्रदेश के प्रभारी मंत्री नारायण सिंह पंवार, स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेन्द्र पटेल, महाबोधि सोसायटी श्रीलंका के प्रमुख वानगल उपतिस्स नायक थेरो सहित अनेक अधिकारी मौजूद रहे।
प्रभारी मंत्री पंवार ने कहा कि आज के वैश्विक हालातों में बुद्ध का शांति, करुणा और सहअस्तित्व का संदेश अत्यंत प्रासंगिक है। स्वास्थ्य राज्यमंत्री पटेल ने सांची को बौद्ध धम्म का अनुपम तीर्थ बताया।
महोत्सव में श्रीलंका के दल द्वारा लोकनृत्य, भक्ति गायन, वेस नृत्य और “बुद्ध का त्याग” नृत्य-नाटिका सहित अनेक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भाव-विभोर किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महोत्सव के लिए शुभकामना संदेश भेजते हुए कहा कि बुद्ध का संदेश आधुनिक विश्व की सभ्यता के लिए मार्गदर्शक है।
दूसरे दिन स्तूप परिसर में भारी भीड़, शहर में बार-बार जाम।
रविवार सुबह वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन भगवान बुद्ध के परमशिष्यों के पवित्र अवशेषों की पूजा-अर्चना और परिक्रमा के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। रेलवे स्टेशन से लेकर स्तूप तक पूरे मार्ग में भीड़ रही और बार-बार जाम की स्थिति बन गई।
पार्किंग व्यवस्था पर्याप्त न होने से लोग वाहनों को सड़क किनारे खड़ा करते रहे, जिससे अव्यवस्था बढ़ी। कई बच्चे भीड़ में बिछड़ गए, जिन्हें नगर परिषद द्वारा की गई घोषणाओं से परिजनों से मिलाया गया। पुरातत्व विभाग ने स्तूपों के निशुल्क दर्शन की सुविधा प्रदान की, जिससे भीड़ और बढ़ी।
रेलवे स्टेशन पर विशेष स्टॉपेज के कारण पूरे दिन भारी भीड़ बनी रही।
आज होंगे कवि सम्मेलन और श्रीलंकाई सांस्कृतिक कार्यक्रम।
महोत्सव के अंतिम दिन आज शाम श्रीलंका की टीम द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन होगा।
सांची इन दिनों शांति, अध्यात्म और संस्कृति से सराबोर होकर एक अनोखी आध्यात्मिक ऊर्जा बिखेर रहा है।

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