सौर ऊर्जा की लाइटें बंद, प्याऊ बदहाल — करोड़ों खर्च के बाद भी सांची अंधेरे में।देश की पहली ‘सोलर सिटी’ कहलाने वाली सांची में सौर परियोजनाएं नाकाम, जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर।

नसीमखान सांची
सांची,,
नगर को सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भर बनाने और बिजली की बचत के उद्देश्य से जिस सांची को देश की पहली सोलर सिटी का दर्जा मिला था, वही सपना आज पूरी तरह धराशायी नजर आ रहा है। सौर ऊर्जा के नाम पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद नगर आज भी अंधेरे और अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है।
जानकारी के अनुसार, सौर ऊर्जा के प्रचार-प्रसार के तहत आनन-फानन में नगर भर में खंभे गाड़कर सोलर लाइटें लगाई गईं। प्रारंभिक समय में क्षेत्र में रोशनी भी दिखाई दी, लेकिन कुछ ही समय बाद इन योजनाओं की कलई खुलने लगी। नगर में लगाए गए कई सोलर खंभे गायब हो चुके हैं, वहीं सोलर प्लेटें टूट-फूटकर तहसनहस अवस्था में पहुंच गई हैं।
नगर के प्रमुख चौराहों पर लगाई गई हाईमास्ट सोलर लाइटें भी केवल नुमाइश बनकर रह गई हैं। रखरखाव के अभाव में ये लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे नगर एक बार फिर अंधेरे की गिरफ्त में चला गया। नतीजतन बिजली पर निर्भरता बढ़ी और बिजली की आंख-मिचौली ने आमजन की परेशानी और बढ़ा दी है। सड़कों के किनारे पड़े ध्वस्त सोलर खंभे और प्लेटें आज भी अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहे हैं।
यही स्थिति नगर में सौर ऊर्जा से संचालित प्याऊ की भी है, जिन पर लाखों रुपये खर्च होने का दावा किया गया था। इन प्याऊ से गर्मी के मौसम में भी गर्म पानी निकलता रहा, जिससे लोगों को राहत के बजाय परेशानी उठानी पड़ी। हैरानी की बात यह है कि निर्माण के बाद से आज तक इन प्याऊ की नियमित सफाई तक नहीं कराई गई। अनदेखी के चलते अब इन पर घास और कचरा जमा हो चुका है।
नगरवासियों में इस स्थिति को लेकर खासा आक्रोश है। सौर ऊर्जा के नाम पर हुई भारी भरकम राशि की बर्बादी पर सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और संबंधित एजेंसियां अब तक जवाबदेही से बचती नजर आ रही हैं।
इस संबंध में एसडीएम रायसेन मनीष शर्मा ने कहा:
“आपके द्वारा संज्ञान में लाया गया है। शीघ्र ही निरीक्षण कर संबंधित लोगों से चर्चा कर आवश्यक व्यवस्था कराई जाएगी।”

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