नसीमखान सांची
सांची,,,,विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगरी सांची में बारिश का मौसम शुरू होने के बाद भी पेयजल संकट समाप्त नहीं हो सका है। गर्मी के दौरान जलस्तर घटने के कारण नगर परिषद ने एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की व्यवस्था लागू की थी। नागरिकों को उम्मीद थी कि मानसून आने और जलसंवर्धन योजना से जलापूर्ति प्रारंभ होने के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन अब भी नियमित जलापूर्ति बहाल नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार, गर्मी के चार महीनों तक नगरवासी सीमित जलापूर्ति के कारण परेशान रहे। इस दौरान करोड़ों रुपये की लागत से संचालित जलसंवर्धन योजना से लोगों को काफी उम्मीदें थीं। योजना से जलापूर्ति शुरू होने के बावजूद नगर परिषद प्रतिदिन पानी उपलब्ध कराने में सफल नहीं हो सकी है। वर्तमान में अधिकांश क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की जा रही है और उसका भी कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं है। परिणामस्वरूप नागरिकों को घंटों पानी आने का इंतजार करना पड़ता है, जबकि जलकर की वसूली नियमित रूप से की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद में अधिकारियों और कर्मचारियों की पर्याप्त व्यवस्था होने के बावजूद विश्व धरोहर स्थल सांची में नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
जल निकासी व्यवस्था भी बनी समस्या
नगर के कई क्षेत्रों में सड़कें तो बना दी गई हैं, लेकिन नालियों का निर्माण नहीं होने से बारिश का पानी सड़कों और गलियों में भर जाता है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई मोहल्लों में आज भी नालियों और पक्की सड़कों का इंतजार है।
स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था भी प्रभावित
लगातार बारिश के कारण कीड़े-मकोड़ों और विषैले जीवों का खतरा बढ़ गया है। ऐसे समय में कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें बंद होने से रात के समय नागरिकों की परेशानी और बढ़ गई है। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि खराब एलईडी लाइटें मरम्मत के लिए भेजी गई हैं।
वहीं, बारिश के चलते सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। जगह-जगह गड्ढों में पानी भरने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया सहित अन्य मौसमी बीमारियों की आशंका बढ़ गई है। नागरिकों ने नगर परिषद से पेयजल, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था में शीघ्र सुधार की मांग की है।
विश्व धरोहर नगरी की पहचान तभी सार्थक होगी, जब यहां की मूलभूत नागरिक सुविधाएं भी उसी स्तर की उपलब्ध होंगी।





