नसीमखान
हरियाली, वन्य जीवों की चहल-पहल और पक्षियों की मधुर चहचहाहट से पर्यटक हो रहे मंत्रमुग्ध
सांची,, मानसून की पहली बारिश के साथ ही विश्व प्रसिद्ध स्तूप परिसर का प्राकृतिक सौंदर्य निखर उठा है। बारिश शुरू होते ही स्तूप पहाड़ी चारों ओर हरियाली की चादर से ढक गई है। विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की चहचहाहट और वन्य प्राणियों की चहल-पहल से पूरा परिसर जीवंत हो उठा है, जो यहां आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
इन दिनों स्तूप पहाड़ी पर राष्ट्रीय पक्षी मोर की मधुर पुकार और उनका मनमोहक नृत्य पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जगह-जगह नृत्य करते मोरों को देखकर पर्यटक अपने मोबाइल कैमरों में इस मनोहारी दृश्य को कैद करते नजर आते हैं।
स्तूप परिसर वन्य जीवों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराता है। यही कारण है कि खरगोश, कबूतर, बत्तख सहित अन्य पक्षी और छोटे वन्य जीव यहां बिना किसी भय के विचरण करते दिखाई देते हैं। परिसर में इनके संरक्षण के लिए सुरक्षित क्षेत्र भी विकसित किया गया है, जहां पहुंचकर पर्यटक पक्षियों को दाना खिलाते हैं। पक्षियों का पर्यटकों के पास निडर होकर पहुंचना और उनकी चहचहाहट वातावरण को और अधिक रमणीय बना देती है।
बारिश के बाद हरियाली से आच्छादित स्तूप पहाड़ी का मनोहारी दृश्य प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है। मानसून के इस मौसम में सांची का स्तूप परिसर प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और शांत वातावरण का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रहा है।
मानसून की हरियाली और मोरों के मनमोहक नृत्य ने इन दिनों सांची के विश्व प्रसिद्ध स्तूप परिसर की प्राकृतिक छटा में चार चांद लगा दिए हैं।



