रिपोर्ट : दीपक कुमार गर्ग (Live khabar india )
शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के गोहपारू तहसील क्षेत्र से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां तहसीलदार द्वारा भूमि रिकॉर्ड (खसरा) में सुधार का स्पष्ट आदेश जारी किए जाने के बाद भी अब तक रिकॉर्ड में संशोधन नहीं किया गया। पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि संबंधित हल्का पटवारी ने न केवल आदेश की अनदेखी की, बल्कि रिकॉर्ड सुधारने के बदले पैसों की मांग भी की।
मामला गोहपारू तहसील के पटवारी हल्का गोडारू का है। पीड़ित कमला सिंह गोंड और जितेंद्र सिंह गोंड ने बताया कि उनके नाम पर 0.809 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। भूमि के बंटवारे के लिए उन्होंने नियमानुसार आवेदन प्रस्तुत किया था। मामले की सुनवाई के बाद 26 जून 2026 को तहसीलदार ने खसरा रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार करने का आदेश जारी किया था।
पीड़ितों का कहना है कि आदेश की प्रति लेकर वे कई बार संबंधित पटवारी के पास पहुंचे और रिकॉर्ड सुधारने का अनुरोध किया, लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि पटवारी ने रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए पैसों की मांग की। जब उन्होंने पैसे नहीं दिए तो खसरा सुधार का कार्य लंबित छोड़ दिया गया।


लगातार चक्कर लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर पीड़ितों ने 31 जुलाई 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) जयसिंहनगर से लिखित शिकायत की। शिकायत में उन्होंने तहसीलदार के आदेश का पालन नहीं किए जाने और पटवारी द्वारा कथित रूप से रिश्वत मांगने की जांच कर कार्रवाई की मांग की। हालांकि शिकायत के बाद भी भूमि रिकॉर्ड में कोई सुधार नहीं हुआ।
पीड़ितों का कहना है कि गलत भूमि रिकॉर्ड के कारण उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। राजस्व अभिलेख सही न होने से उन्हें प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ कृषि और अन्य सरकारी सुविधाओं में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि तहसीलदार के आदेश के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में सुधार नहीं हो रहा है, तो आम नागरिकों को न्याय मिलने में देरी होना स्वाभाविक है। अब पीड़ितों ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा शीघ्र भूमि रिकॉर्ड दुरुस्त कराने की मांग की है।
नोट: पटवारी पर लगाए गए पैसे मांगने के आरोप पीड़ितों द्वारा लगाए गए हैं। इस मामले में संबंधित पटवारी या राजस्व विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।





