रिपोर्ट: अजय अहिरवार|Live khabar india
भोपाल। राजधानी भोपाल के पुराने शहर में स्थित मोती मस्जिद के सामने महीनों से लगी बैरिकेडिंग अब व्यापारियों और स्थानीय लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बन गई है। शुक्रवार को इस विवाद ने उस समय तूल पकड़ लिया जब चौक बाजार, लखेरापुरा और आसपास के व्यापारियों ने दुकानों के शटर बंद कर सड़क पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। व्यापारियों का कहना है कि बैरिकेडिंग के कारण न केवल उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम लोगों और वाहनों को भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापारियों ने दोपहर तक विरोध प्रदर्शन जारी रखा और प्रशासन से बैरिकेडिंग हटाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और बड़ी संख्या में व्यापारी सड़क पर उतर आए। बाद में पुलिस अधिकारियों द्वारा उचित कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया।
व्यापारी संगठनों का आरोप है कि मोती मस्जिद के सामने इकबाल मैदान चौराहे पर की गई बैरिकेडिंग के कारण पुराने भोपाल के प्रमुख बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। भोज सेतु की ओर से आने वाले वाहन चालकों को लंबा चक्कर लगाकर सदर मंजिल, चिरायु अस्पताल, लखेरापुरा, चौक बाजार, सराफा, जुमेराती और इब्राहिमगंज जैसे क्षेत्रों में जाना पड़ रहा है। इससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है, वहीं बाजारों में ग्राहकों की संख्या भी कम हुई है।
व्यापारियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर पहले भी प्रशासन और पुलिस को कई बार अवगत कराया गया था। हाल ही में एक रैली निकालकर चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यही कारण है कि व्यापारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
इस विरोध प्रदर्शन में भोपाल व्यापारी महासंघ, श्री सराफा एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ राजधानी वस्त्र व्यापारी संघ, ओल्ड भोपाल होलसेल रेडीमेड संघ, आजाद मार्केट व्यापारी संघ, नदिम रोड व्यापारी संघ और इब्राहिमपुरा व्यापारी संघ सहित कई संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में बैरिकेडिंग हटाने और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने की मांग की।
व्यापारियों ने एक गंभीर उदाहरण भी सामने रखा। उनका कहना है कि 1 अगस्त को चौक बाजार क्षेत्र में स्थित लगभग 100 वर्ष पुरानी कपड़े की दुकान में आग लग गई थी। उस दौरान दमकल वाहन बैरिकेडिंग के कारण समय पर घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके, जिससे आग पर काबू पाने में देरी हुई। व्यापारियों के अनुसार यह घटना साबित करती है कि बैरिकेडिंग केवल यातायात ही नहीं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं के लिए भी बाधा बन रही है।
स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियंत्रण जरूरी है, लेकिन इसके लिए ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए जिससे बाजारों का कारोबार प्रभावित न हो और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो व्यापारी संगठन आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दे चुके हैं।






