नसीम खान
सांची,,,भाई-बहन के अटूट प्रेम, श्रद्धा, विश्वास और सुरक्षा का पवित्र पर्व रक्षाबंधन नगर सहित पूरे क्षेत्र में हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना की, वहीं भाइयों ने बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार भेंट किए।
रक्षाबंधन के अवसर पर सुबह से ही बाजारों में रौनक दिखाई दी। विभिन्न रंगों और आकर्षक डिजाइनों वाली राखियों से बाजार सजे रहे। महंगाई के बावजूद पर्व की खुशियों में कोई कमी नहीं आई और बहनों ने उत्साहपूर्वक अपने भाइयों के लिए राखियां खरीदीं। घर-घर में बहनों ने भाइयों का तिलक कर उनकी कलाई पर राखी बांधी तथा मिठाई खिलाकर पर्व की खुशियां मनाईं।
प्रेम और सुरक्षा के संकल्प का पर्व
रक्षाबंधन को भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और परस्पर विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती है, जबकि भाई अपनी बहन की सुरक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेता है। यही रक्षा सूत्र भाई-बहन के रिश्ते को प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी के मजबूत बंधन में बांधता है।
पर्व की विशेषता यह भी रही कि छोटे-छोटे नौनिहाल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साह के साथ रक्षाबंधन मनाया। घरों में मिठाइयों और पकवानों का दौर चलता रहा तथा बहनों और भाइयों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।
सामाजिक सद्भाव की भी बनी मिसाल
रक्षाबंधन का यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते के साथ सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश भी देता नजर आया। नगर में अनेक हिंदू भाइयों की कलाई पर मुस्लिम बहनों ने राखी बांधी, वहीं हिंदू बहनों ने भी अपने मुस्लिम भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर इस रिश्ते को और मजबूत किया। दोनों समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे के सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए आपसी भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया।
इस प्रकार रक्षाबंधन ने एक बार फिर साबित किया कि प्रेम और विश्वास के मजबूत धागे जाति और धर्म की सीमाओं से कहीं ऊपर होते हैं।
राखी का धागा केवल कलाई नहीं बांधता, यह दिलों को जोड़कर प्रेम, विश्वास और भाईचारे का मजबूत रिश्ता कायम करता है।




