रिपोर्ट : नवेद खान |Live Khabar india
विदिशा। विदिशा जिले से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित कागपुर गांव अब सिर्फ अपने तालाब और प्राकृतिक वातावरण के लिए नहीं जाना जाएगा। यहां मौजूद प्राचीन तालाब और उसके आसपास के क्षेत्र को अब पक्षियों के सुरक्षित प्राकृतिक आवास के रूप में नई पहचान मिल गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने कागपुर क्षेत्र को ‘कागपुर पक्षी कंजर्वेशन रिजर्व’ घोषित कर दिया है। राज्य वन विभाग की अधिसूचना के बाद करीब 53.5 हेक्टेयर क्षेत्र अब पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण के लिए चिन्हित हो गया है।
दो नदियों के बीच बसा है कागपुर का तालाब
कागपुर की खास भौगोलिक स्थिति इसे पक्षियों के लिए अनुकूल बनाती है। यह क्षेत्र बेतवा और बाह्य नदियों के बीच स्थित है। यहां मौजूद प्राचीन तालाब में लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहने और आसपास के प्राकृतिक वातावरण के कारण बड़ी संख्या में वन्य पक्षियों का बसेरा देखा जाता रहा है।
तालाब के आसपास बगुला, ब्लैक आइबिस, रामचिरैया और नीलकंठ समेत कई पक्षियों की मौजूदगी इस क्षेत्र को खास बनाती है। यही वजह है कि लंबे समय से कागपुर को पक्षियों के प्राकृतिक आवास के रूप में देखा जाता रहा है।
अब सरकारी संरक्षण की मुहर
कागपुर की पहचान को अब सरकारी संरक्षण भी मिल गया है। वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 36(क) के तहत कागपुर को कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया है। अधिसूचना का प्रकाशन 25 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश राजपत्र में किया गया।
अधिसूचना के मुताबिक रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 0.535 वर्ग किलोमीटर यानी 53.5 हेक्टेयर है। इसमें कागपुर और आसपास के क्षेत्र की चिन्हित राजस्व भूमि को शामिल किया गया है तथा रिजर्व की सीमाएं भी राजपत्र में निर्धारित की गई हैं।
कौन-कौन सी जमीन रिजर्व में शामिल?
सरकारी अधिसूचना के अनुसार कागपुर गांव के खसरा नंबर 125 और 126 के साथ गातला गांव के कुछ खसरा नंबरों की जमीन भी रिजर्व में शामिल की गई है। इस तरह अलग-अलग खसरा क्षेत्रों को मिलाकर कुल 53.5 हेक्टेयर क्षेत्र को पक्षी संरक्षण रिजर्व के दायरे में लाया गया है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब मिला आधिकारिक दर्जा
कागपुर को पक्षियों के सुरक्षित क्षेत्र के रूप में विकसित करने की कहानी में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कड़ी भी है। रिपोर्टों के मुताबिक 21 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कागपुर पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने कागपुर को पक्षियों के लिए सुरक्षित क्षेत्र बनाने की घोषणा की थी।
करीब नौ महीने बाद अब उस घोषणा को सरकारी अधिसूचना के जरिए औपचारिक रूप मिल गया है। यानी जिस कागपुर को पक्षियों के लिए सुरक्षित क्षेत्र बनाने की घोषणा की गई थी, वह अब आधिकारिक तौर पर कागपुर पक्षी कंजर्वेशन रिजर्व बन चुका है।
गांव के लोगों को भी उम्मीद, बदलेगी कागपुर की पहचान
कागपुर के ग्रामीणों के लिए भी यह फैसला सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि आने वाले समय में पक्षियों के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ सकती है।
एक समय जिस तालाब को ग्रामीण अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए देखते थे, वही अब कागपुर की पहचान का नया केंद्र बनता नजर आ रहा है। अगर संरक्षण की योजनाएं प्रभावी तरीके से आगे बढ़ती हैं तो यह क्षेत्र भविष्य में बर्ड वॉचिंग और प्रकृति पर्यटन के लिए भी विकसित हो सकता है।

5 हजार पौधे, तारों की सुरक्षा और गार्डन से बदलेगी तस्वीर
कागपुर में संरक्षण की दिशा में जमीन पर भी काम दिखाई देने लगा है। वन विभाग की ओर से अलग-अलग प्रजातियों के करीब 5 हजार पौधे लगाए जाने, क्षेत्र के आसपास तारों की सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने और गार्डन विकसित करने की जानकारी सामने आई है।
गार्डन क्षेत्र में हरियाली के साथ पत्थरों से तैयार की गई आकृतियां, फव्वारे और अन्य सौंदर्यीकरण कार्य भी किए गए हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र को आकर्षक बनाने के साथ-साथ लोगों में प्रकृति और पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
प्रवासी पक्षियों के लिए बन सकता है बड़ा ठिकाना
कागपुर को कंजर्वेशन रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद सबसे बड़ी उम्मीद यहां पक्षियों की संख्या और प्रजातियों में बढ़ोतरी को लेकर है। जल स्रोत, हरियाली और अपेक्षाकृत शांत प्राकृतिक वातावरण पक्षियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराते हैं।
वन विभाग का मानना है कि संरक्षण के प्रयास लगातार जारी रहे तो आने वाले समय में यहां पक्षियों की संख्या और प्रजातियां दोनों बढ़ सकती हैं। इससे कागपुर की पहचान विदिशा के एक गांव से आगे बढ़कर पक्षी प्रेमियों के संभावित नए डेस्टिनेशन के रूप में बन सकती है।

कागपुर के लिए क्यों खास है यह फैसला?
मध्य प्रदेश का पहला पक्षी संरक्षण केंद्रित कंजर्वेशन रिजर्व बताया जा रहा है।
कुल 53.5 हेक्टेयर क्षेत्र संरक्षण के दायरे में आया है।
क्षेत्र में प्राचीन तालाब और प्राकृतिक जल स्रोत मौजूद हैं।
कागपुर दो नदियों के बीच स्थित है।
बगुला, ब्लैक आइबिस, रामचिरैया और नीलकंठ जैसे पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवंबर 2025 में इसे पक्षियों के सुरक्षित क्षेत्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी।
अब राजपत्र अधिसूचना के बाद इसे आधिकारिक संरक्षण का दर्जा मिल गया है।
कागपुर की कहानी अभी शुरू हुई है…
कागपुर का तालाब अब सिर्फ पानी का स्रोत नहीं रह गया है। यह क्षेत्र अब पक्षियों के प्राकृतिक आवास को बचाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा बन चुका है।
तालाब के किनारे उड़ते पक्षी, पेड़ों पर उनकी चहचहाहट और चारों तरफ फैली हरियाली आने वाले समय में कागपुर की नई पहचान बन सकती है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि संरक्षण के साथ यहां प्राकृतिक वातावरण को बनाए रखा जाए और विकास ऐसा हो जिससे पक्षियों का आशियाना भी सुरक्षित रहे और लोगों के लिए कागपुर एक आकर्षक प्रकृति स्थल भी बन सके।
कागपुर अब तालाब से ‘पक्षियों के आशियाने’ तक का सफर तय कर चुका है।






