नसीम खान
सांची,,,हजारों वर्ष पुरानी ऐतिहासिक एवं विश्व प्रसिद्ध धरोहर के रूप में पहचान रखने वाला सांची नगर आज भी समुचित बिजली एवं स्ट्रीट लाइट व्यवस्था के अभाव में अंधेरे की चपेट में है। नगर को सुंदर और रोशन बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने तथा विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाने के बावजूद प्रमुख मार्गों पर अंधेरा पसरा रहना प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थिति यह है कि तीज-त्योहारों के अवसर पर भी नगरवासियों को अंधेरे से राहत नहीं मिल पा रही है, जिसका असर यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों पर भी पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार सांची का ऐतिहासिक महत्व हजारों वर्ष पुराना माना जाता है और यहां प्राचीन धरोहरें सुरक्षित हैं। पर्यटन एवं सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थल पर शासन-प्रशासन द्वारा समय-समय पर करोड़ों रुपये की विकास योजनाएं संचालित की गई हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर नगर को रोशन और सुंदर बनाने तक के दावे किए जाते रहे हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग द्वारा नगर में स्ट्रीट लाइट के पोल लगाए गए थे, लेकिन कुछ समय तक रोशनी देने के बाद अधिकांश लाइटें बंद हो गईं। अब कई स्थानों पर पोल खड़े हैं, लेकिन सड़कें अंधेरे में हैं।
नगरवासियों का कहना है कि स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की बदहाली केवल आवागमन की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा और नगर की छवि से भी जुड़ा विषय है। विशेष रूप से शाम और रात के समय प्रमुख मार्गों पर अंधेरा रहने से असुविधा बढ़ जाती है। वहीं, नगर में लगाए गए कई बिजली पोल अब आड़े-तिरछे दिखाई देने लगे हैं, जिससे इनके गिरने की आशंका भी बनी हुई है।
अतिथि आते ही जगमगाता है नगर, जाते ही फिर अंधेरा
नगरवासियों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि जब कोई विशिष्ट अथवा अति विशिष्ट अतिथि सांची आता है तो स्ट्रीट लाइट व्यवस्था अचानक दुरुस्त दिखाई देने लगती है, लेकिन अतिथि के जाते ही नगर फिर अंधेरे में डूब जाता है। इसी कारण लोगों में इसे लेकर अब ‘अतिथि लाइट’ जैसी चर्चा होने लगी है। ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी की स्थायी बिजली व्यवस्था के बजाय केवल विशेष अवसरों पर रोशनी किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
देश की पहली सोलर सिटी का सपना भी धुंधला
सांची को देश की पहली सोलर सिटी के रूप में विकसित करने का सपना भी दिखाया गया था। इस दिशा में करोड़ों रुपये की योजनाएं और व्यवस्थाएं किए जाने की बात सामने आती रही, लेकिन कुछ समय बाद सोलर ऊर्जा से संचालित होने वाली कई व्यवस्थाएं भी बंद होती चली गईं। नगरवासियों में इस बात को लेकर चर्चा है कि नगर को रोशन करने के नाम पर खर्च की गई राशि का अपेक्षित परिणाम आखिर क्यों दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की उपयोगिता और उनके रखरखाव पर भी सवाल उठने लगे हैं।
इस संबंध में नगर परिषद सीएमओ रामलाल कुशवाहा से फोन पर चर्चा करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
जिम्मेदारों ने कहा—जल्द चालू कराने के प्रयास करेंगे
नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम ने कहा कि नगर में लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को स्ट्रीट लाइट व्यवस्था के संबंध में कई बार निर्देश दिए गए हैं, लेकिन बिजली व्यवस्था को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके कारण नगर में अंधेरा रहता है। उन्होंने कहा कि एक बार फिर प्रयास कर स्ट्रीट लाइट चालू कराई जाएगी।
अतिरिक्त तहसीलदार सांची सुरेश सिंह ने बताया कि स्ट्रीट लाइट का मुद्दा पिछली शांति समिति की बैठक में भी उठाया गया था। उस समय राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद लाइटें चालू की गई थीं। अब लाइट में कहीं खराबी होने की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को शीघ्र लाइटें चालू करने के निर्देश दिए जाएंगे तथा नगर परिषद सीएमओ को भी बिजली व्यवस्था सुचारू करवाने के लिए कहा जाएगा।
समाजसेवी कमलकिशोर पटेल ने कहा कि स्ट्रीट लाइट का मुद्दा शांति समिति की बैठक में भी उठाया गया था, लेकिन नगर अब पूरी तरह अंधेरे में है। जगह-जगह लगाए गए बिजली पोल भी आड़े-तिरछे हो चुके हैं, जो कभी भी गिरकर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। जब लाइटें जल ही नहीं रही हैं तो ऐसे पोलों को हटाना ही उचित होगा।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अंकित मेहतो ने कहा कि विकास के नाम पर लगातार करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर विकास के दावे खोखले दिखाई दे रहे हैं। त्योहारों के समय जब नगर अंधेरे में डूबा रहता है, तब व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ जाती है और लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।





