नसीम खान संपादक
सांची,,, वैसे तो केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को क्रियान्वित करने कोई कौर कसर नहीं छोड़ना चाहती तथा लाखों करोड़ों खर्च कर जमीनी स्तर पर योजनाओं को पहुंचाने की कवायद करती दिखाई देती है परन्तु इस स्थल पर पुरातत्व विभाग सरकारों पर भारी दिखाई पड़ता है जिससे सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर पर पहुंचने के पहले ही दम तोड़ देती है ऐसा ही कुछ इस नगर में दिखाई देता है।
जानकारी के अनुसार यह नगर एक विश्व विख्यात पर्यटक स्थल के रूप में विख्यात है इस स्थल पर अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने सरकारें लाखों करोड़ों खर्च कर विकास के साथ ही जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में कोई कौर कसर नहीं छोड़ना चाहती तथा आये दिन न ई न ई योजनाओं को लागू किया जाता है परन्तु इस विश्व विख्यात पर्यटक स्थल पर इन सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचने के पूर्व ही पुरातत्व विभाग आड़े आकर धराशाई कर देता है । केंद्र सरकार की देशभर में स्वस्छता को लेकर घर घर शौचालय निर्मित किये जाने थे परन्तु इन शौचालयों के बीच भी पुरातत्व विभाग की अड़ंगे बाजी चलती रही इसके साथ ही केंद्र सरकार ने बेघर गरीबों को अपना स्वयं का घर हो । इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना लागू कर दी ।यह योजना का लाभ नगर के अनेक वार्ड वासियों को नसीब भी हो गया तथा लोगों को अपने स्वयं के घर इस योजना अंतर्गत मिल गये । परन्तु नगर के कुछ वार्ड ऐसे भी हैं जहां इस योजना की कार्यवाही तो पूरी कर दी गई परन्तु पुरातत्व विभाग पीएम योजना पर भारी पड़ गया तथा यह योजना ने जमीनी स्तर पर पहुंचने के पहले ही दम तोड़ दिया जिससे झोपड़ी टपरियों वाले आज भी इस योजना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं पुरातत्व विभाग का तीन सो मीटर वाला नियम आड़े आ रहा है हालांकि लगभग सभी वार्डों की दूरी अधिक होने के बाद भी इस नियम की चपेट में आने से सरकारी योजनाएं खटाई में पड़ रही है यहां तक कि नगरीय क्षेत्र में आवासीय लोगों को नगर परिषद के विभिन्न करो का भुगतान तो करना ही पड़ता है जब नगर परिषद प्रशासन लोगों को सुविधा उपलब्ध कराने सड़क नाली मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास करता है तब पुरातत्व विभाग आड़े आ जाता है हालांकि पुरातत्व विभाग को सरकार ने लगभग सौ एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है बावजूद इसके आधे से अधिक नगर पर पुरातत्व विभाग आड़े आकर लोगों की परेशानी का सबब बन गया है तब पीएम आवास योजना भी पुरातत्व विभाग के सामने अपने आप को बौना साबित करने लगी है यही कारण है नगर का जैसा सौन्दर्यीकरण तथा विकास किया जाना चाहिए नहीं हो सका । हाल ही में नगर में नगर सहित देशी विदेशी पर्यटकों को स्वच्छ ठंडे पानी की व्यवस्था हेतु सोलर ऊर्जा विभाग एवं एक बैंक के संयुक्त तत्वावधान में जगह जगह स्थाई जलकेंद्र निर्मित किये गये है इसी तर्ज पर स्तूप गेट नं, 1 के पास भी जलकेंद्र निर्मित किया जाना था परन्तु यहां आधा निर्माण ही हो सका तथा आधा निर्माण बताया जाता है पुरातत्व विभाग द्वारा रुकवा दिया गया जिससे वह अपने अधूरे पड़े होने की कहानी बयां कर रहा है जबकि जलकेंद्र एक सार्वजनिक सेवा के रूप में मानी जाती है न स्वयं विभाग कोई सुविधा उपलब्ध कराने में आगे बढ़ पाता है तथा जब सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाते हैं तब आड़े जरूर आ जाता है जिसका खामियाजा नगर के लोगों को तो भोगना ही पड़ता है साथ में पर्यटक भी अछूते नहीं रहते हैं।तब लोग पुरातत्व विभाग से दूरी बना कर रखते हैं ।






