छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार पर ,नोट बंदी ,को लेकर निशाना साधा

जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
दिलेसर चौहान,, संवाददाता

सीएम भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कटाक्ष किया, नोटबंदी के 9 साल पूरे होने को है जिस वजह से नोटबंदी की गई, लॉक डाउन की गई, उनसे कुछ हासिल नहीं हुआ ।
उल्टे गरीबों ,किसानों ,बेरोजगारों पर भार पड़ गया।
5 साल में केंद्र सरकार के द्वारा ऐसी कोई अच्छी योजना देश में नहीं लाई गई ।
महंगाई ,बेरोजगारी, बढ़ने पर जीएसटी और नोटबंदी को जिम्मेदार ठहराया है।.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने मंगलवार को रायपुर हेलीपैड में मीडिया से बातचीत करते हुए कहां की देश में लगातार रुपए कमजोर होना, जीएसटी की वजह से महंगाई बड़ी, और नोटबंदी की वजह से बेरोजगारी बढ़ गई।


इससे सबसे ज्यादा परेशान नौजवान युवा ,और किसानों को भुगतना पड़ा ,
अन्नदाता किसानों को सही दाम बेरोजगार नौजवानों को नौकरी नहीं मिल पाया ।
और आज भी यही स्थिति बनी हुई है।
मीडिया से बातचीत करते हुए भूपेश बघेल नेकहा कि जीएसटी की वजह से मंगाई बड़ी है और यह केंद्र सरकार जिम्मेदार है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में 2016 में नोटबंदी की गई
वही दूसरे कार्यकाल में ₹2000 बंद कर दिया गया है ।
पीएम ने 500 और 1000 के नोट बंद कर 500 के नए नोट और ₹2000 के नोट जारी किए। आरबीआई ने समय सीमा भी निर्धारित कर दी ,30 सितंबर तक आप 20000 रुपए तक नोट बदल सकते हैं ।
लोग अपनी 2000 के नोट को निश्चित समय पर बदल सकते हैं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने आदेश जारी कर सभी बैंक 30 सितंबर 2023 तक 2000 को बदलने के निर्देश दिए ताकि आम जनता को परेशानी ना हो ।
लोग अपनी ₹2000 को जमा कर सकते हैं या फिर बदल सकते हैं जानकारी के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय डेबिट या क्रेडिट कार्ड का प्रयोग कर ,प्रतिवर्ष सात लाख तक का कोई भी भुगतान एल आर एस सीमा से बाहर रखा जाएगा ।
2016 में नोटबंदी आम जनता को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था कई किसानों ने आत्महत्या भी कर लिया था, जरूरतमंद किसानों को गरीबों को लाइन में खड़ा कर पैसे के लिए मोहताज होना पड़ा था।
शादी हो पूजा हो या जीवका के समस्त स्रोत आर्थिक सामाजिक ,उद्योग ,सभी पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ा था ।
जबकि नोटबंदी के फरमान सुनते ही लोगों में खासतौर से गरीबों में नोटबंदी के दौर का वह मंजर भी सामने आ जाता है
, वह हालात बीमार को बीमार रहने पर मजबूर कर दिया था। पैसा अभाव में कई लोगों ने अपनी जान गवा दिया था,
घर में चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया था ।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नोटबंदी के आनन-फानन में लिया गया जल्दी बाजी का फैसला बताया।
बिना तैयारी के अचानक नोटबंदी कर देने से समस्त छोटे उद्योगों किसानों को गरीब बेरोजगारों को प्रभाव पड़ता है। पिछले नोटबंदी में स्थिति को सामान्य होने में कई महीने लग गए थे।
वही उद्योगों को भी इससे बहुत बड़ा धक्का पहुंचा उद्योगों की स्थिति भी खराब हो गई थी आम जनता के परेशानी पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कई नेताओं ने भी टीका टिप्पणी की थी।
आखिरकार नोटबंदी का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसकी गहन 6 महीने तक लंबी सुनवाई के बाद इस साल की शुरुआत में 3 जनवरी को फैसला सुनाते हुए माना कि नोटबंदी का फैसला सही था जिससे सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सरकार को राहत पहुंचा था ।
कुल मिलाकर नोटबंदी पर कई पार्टी के नेताओं ने भी केंद्र सरकार पर तंज कसा है ।
देखते हैं आने वाले दिनों में ₹2000 की नोट बंदी पर आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ता है। अब हालांकि 2000 के नोट की छपाई नहीं होगी ।
मगर उसका अस्तित्व रहेगा भले ही उस का कार्यकाल समाप्त हो गया है।

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