नसीम खान
रायसेन ,, मनरेगा नियमानुसार योजना का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की सच्चाई जानने वर्ष में दो बार आडिट कराने का प्रावधान किया गया है परन्तु लापरवाही के चलते दो वर्षों से मनरेगा का आडिट नहीं कराया जा सका मीडिया में प्रमुखता से यह मामला जोर पकड़ा तब कहीं जाकर शासन प्रशासन की नींद टूटी तब मप्र स्टेट सामाजिक संपरीक्षा समिति भोपाल द्वारा 16 अगस्त को आनन फानन में सोशल आडिट कराने के निर्देश जारी किए गए परन्तु यह आडिट निर्देश बिना पूर्व तैयारी के जारी हुए । इससे यह आशंका बलवती होने लगी है कि आडिट के नाम पर खानापूर्ति की कवायद जुटाई जा रही है तथा सोशल तब इससे शासन प्रशासन की छवि भी बलवती होने लगी है जबकि सोशल आडिट के पूर्व ग्राम सामाजिक एनिमेटर वाय एस ए को विगत वर्ष का मानदेय का भुगतान हो प्रिंट आउट सहित अन्य खर्च का भुगतान किया गया हो ब्लाक एवं जिला कोआर्डिनेटर सोशल आडिट का भुगतान चार माह का किया गया हो जिससे अधिक से अधिक पंचायतों का निरीक्षण किया जा सके इस स्थिति मे तथा यात्रा भत्ते का भी संशोधित निर्देश जारी किए गए






