जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
प्रदेश संवाददाता दिलेश्वर चौहान
पूरे देश में मकर संक्रांति की धुम,
पूरे
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिला महानदी के किनारे मेले के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।
यह नजारा देखते हुए बनता है, क्यों कि यहां हर साल दूर-दूर से सैलानी नदी में नहाने आते हैं।
और मेले का आनंद उठाते हैं
धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अलग-अलग मान्यताएं हैं।
धार्मिक दृष्टिकोण से कर्क और मकर रेखा प्रवेश करने से स्वच्छ जल में नहाने और सूर्योदय के पश्चात पूजा अर्चना कर सूर्य देव की आराधना करने से मनोकामना सिद्ध होता है ।
ऐसी मान्यताएं सदियों से चली आ रही है
वही वैज्ञानिक दृष्टिकोण में शरीर में एनर्जी एवं स्वच्छ जल नदी में स्नान करने से कई बीमारियों का प्रकोप नहीं होता है यह संतुलन काफी महत्वपूर्ण रखता है।
वैसे भी आज के जनरेशन में देखा जाए तो रौनकता मेले मे जलसा पिकनिक मनाकर आनंद उठाते हैं।
और मिठाई खाकर खास तौर से तिल सकराज भगवान को तिल के लड्डू के भोग चढ़कर भगवान का आशीर्वाद लेते हैं। देखा जाए तो मांग पूर्णिमा के लगते ही नया साल का आगाज हो जाता है।
ग्राम बसंतपुर बैराज हजारों की तादाद में दूर-दूर से लोग आकर महानदी में डुबकी लगाकर सित बाबा का प्रणाम कर आशीर्वाद लेते हैं। मकर संक्रांति 14 जनवरी को महानदी की बरेकेल पुल बसंतपुर बैराज पुल और श्री नारायण दार्शनिक स्थल एवं पर्यटक स्थल त्रिवेणी संगम में हजारों की तादाद में लोग उपस्थित होकर खुशियां मनाते हैं।और मनोकामना के लिए भूतेश्वर नाथ मंदिर शिवरीनारायण में आशीर्वाद लेते हैं।






