छत्तीसगढ़ बिर्रा
रिपोर्टर गिरिजाशंकर देवांगन
बरसात का मौसम शुरू होते ही आवारा मवेशी सड़क पर डेरा डाल रहे हैं। जिसके चलते वाहन चालकों को आवागमन में बाधा आ रही है। इन मवेशियों के कारण हर पल दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। रात के अंधेरे में वाहनों की लाइटों में यह मवेशी वाहन चालकों को नही दिख पाते हैं जिसके चलते वह मवेशियों से टकराकर हादसे का शिकार हो जाते हैं।
बिर्रा समेत क्षेत्र की सड़को पर इन दिनों आवारा मवेशियों का जमघट लगा रहता है। बड़ी संख्या में मवेशी सड़कों पर दिन रात भटकते रहते हैं व बैठे रहते हैं। इस कारण कई बार आवागमन बाधित हो जाता है। मवेशियों के कारण वाहन चालकों का मार्ग से निकलना मुश्किल हो जाता है।
पशुपालकों की लापरवाही के कारण नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पशुपालक अपने मवेशियों को खुला छोड़ देते हैं इसके चलते बड़ी संख्या में नगर की गलियों में, बाजारों में मवेशी दिन भर घूमते हैं और मार्ग पर कही भी बैठ जाते हैं। इस कारण मार्ग बाधित होते हैं। वाहन चालक हॉर्न बजाते रहते हैं किंतु इन पशुओं पर इसका कोई असर नहीं होता। शाम होते ही मवेशी बीच सड़क पर बैठ जाते हैं। जिसके कारण वाहन चालकों की परेशानी बढ़ जाते हैं। आवारा पशुओं के साथ हो रही दुर्घटनाओं को लेकर सड़को में विरोध करने वाले गौ सेवक संगठनों को शायद दिखाई नहीं दे रहा है कि बीच सड़क पर बैठ कर आवारा पशु स्वयं दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं।जब घटना घट जाती है तब गौ सेवक जागते हैं। लोगों का कहना है कि गौ सेवको को इस विषय पर काम करना चाहिए कि पशु मालिक अपने मवेशियों को आवारा न छोड़े। वही जानवर रखने का स्थान न हो तो गौशाला में भेज दे। लेकिन वे इस विषय पर काम नही करते बल्कि जानवरो के साथ होने वाली दुर्घटना का इंतजार करते हैं और सड़को पर अपने नाम के लिए विरोध दर्ज़ करते हैं जबकि गौ सेवको को मूल विषय पर काम करना चाहिए जिससे वे काफी दूर है।






