उमरिया में प्यासी जनता, कागज़ों में बहता पानी!

राजर्षिमिश्रा उमरिया

नल-जल योजना और जल जीवन मिशन पर उठे बड़े सवाल, PHE विभाग पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप


उमरिया। केंद्र और राज्य सरकार जहां “हर घर जल” का सपना दिखा रही है, वहीं उमरिया जिले में जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। जिले में नल-जल योजना, जल जीवन मिशन और अन्य पेयजल योजनाओं की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज तक जिले का एक भी गांव पूर्ण रूप से लाभान्वित नहीं हो पाया।
ग्रामीण क्षेत्रों में अधूरी पाइपलाइनें, बंद पड़ी पानी टंकियां, खराब हैंडपम्प और सूखी नल योजनाएं विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। लोगों का कहना है कि PHE विभाग केवल कागजों में योजनाओं को पूरा दिखाने में लगा है, जबकि धरातल पर जनता आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है।
ग्रामीणों के अनुसार, जब से PHE के कार्यपालन अभियंता एच. एस. धुर्वे की पदस्थापना उमरिया जिले में हुई है, तब से जिले की पेयजल योजनाएं पूरी तरह पटरी से उतर गई हैं। आरोप है कि नल-जल योजना और जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी हैं।
लोगों का कहना है कि कई गांवों में पाइपलाइन बिछाकर कार्य अधूरा छोड़ दिया गया, कहीं टंकियां बनकर बंद पड़ी हैं तो कहीं महीनों से हैंडपम्प खराब पड़े हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि हैंडपम्प मरम्मत जैसे कार्यों के लिए भी गरीब ग्रामीणों से पैसे मांगे जाते हैं, जबकि इन योजनाओं के रखरखाव के लिए शासन पहले से बजट जारी करता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी योजनाओं को जनता की सुविधा के बजाय कमाई का साधन बना चुके हैं। शिकायतों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता और ग्रामीणों को लगातार आश्वासन देकर टाल दिया जाता है।

इस मामले में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दिलीप पांडेय ने भी PHE विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा—

“पीने के पानी को लेकर जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार और PHE विभाग की लापरवाही निंदनीय है। पेयजल का सौदा करने वाले लोगों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भ्रष्टाचार में लिप्त दोषी अधिकारियों पर उचित मंच पर कार्रवाई की बात मजबूती से उठाई जाएगी।”

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी उमरिया जिले की जनता प्यास से क्यों जूझ रही है? यदि योजनाएं सफल हैं, तो गांवों तक पानी क्यों नहीं पहुंच रहा? यदि बजट जारी हुआ है, तो कार्य अधूरे क्यों हैं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि शासन की योजनाओं के साथ खिलवाड़ है। जनता अब मांग कर रही है कि जिले में नल-जल योजना, जल जीवन मिशन और सभी पेयजल परियोजनाओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि शासकीय राशि के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार या अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

उमरिया की प्यास अब केवल पानी की नहीं, बल्कि जवाबदेही की भी है।

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