ऐतिहासिक स्थल को है सक्रिट हाउस की दरकार ।लंबे समय से उठ रही मांग।

नसीमखान
सांची,,, कहने को तो यह स्थल पर्यटन का केंद्र माना जाता है परन्तु इस स्थल पर पूर्व में सरकारी सक्रिट हाउस को खत्म कर दिया गया था तब से ही यहां आकर ठहरने वालों की भारी भरकम राशि खर्च करने पर मजबूर होना पडता है तथा सरकारी सर्किट हाउस न होने से सरकारी अधिकारियों को भी यहां वहां भटकने पर मजबूर होना पडता है तत्कालीन कलेक्टर की घोषणा भी काम न आ सकी ।
जानकारी के अनुसार यह स्थल एक विश्व ऐतिहासिक स्थल के रूप में विख्यात है इस स्थल पर पूर्व में रेश्ट हाउस व सर्किट हाउस हुआ करता था जहाँ अतिथि विश्राम कर लेते थे परन्तु समय गुजरा पुरातत्व विभाग ने रेश्ट हाउस को कब्जा लिया तथा प्राचीन होने के कारण उसे संरक्षित करने का बीडा उठाया परन्तु रेश्ट हाउस के हालात बद से बत्तर हो चले तथा कवेलू भी बिखरने लगे ।उसे अपने परिसर में मिलाकर भगवान भरोसे छोड़ दिया गया ।इसी प्रकार कुछ समय बाद यहाँ लोनिवि का सर्किट हाउस हुआ करता था जिसमें अनेकों देश विदेश के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री ने इसमे विश्राम कर सुशोभित किया था परन्तु इस सर्किट हाउस पर पर्यटन विभाग की नजर पड गई तथा उसे हथियाने के प्रयास शुरू हो गए आखिर कार लोनिवि इस भवन को अपने अधीन रखने में पूरी तरह असफल साबित हो गया तथा आसानी से इसे पर्यटन विभाग के हवाले कर दिया जिससे पर्यटन विभाग ने इसे एक पार्क का रूप दे डाला तथा इस पर शुल्क लगा दिया ।एवं लोनिवि ने अपना तामझाम समेट कर उपयंत्री के लिए बनाया गया आवास मे भर दिया ।उल्लेखनीय हैं कि इस सर्किट हाउस में जब कभी इस स्थल का अवलोकन करने आने वाले विशिष्ट अतिविशिष्ट लोगों के स्वागत सत्कार के लिए प्रतीक्षा करने का स्थान बना लिया था तथा सरकारी होने के कारण यहाँ खानपान भी सस्ता उपलब्ध होता था तथा अधिकारी कर्मचारियों को ठहरने का स्थान भी रहता था परन्तु इसके छिनने के बाद से ही नगर सरकारी रेश्ट हाउस एवं सर्किट हाउस का भवन तो छिन गया केवल नाम एवं स्मृति ही रही हालांकि अनेक बार नगर वासियों ने इस स्थल पर सर्किट हाउस की मांग उठाई परन्तु सफलता हाथ नहीं लग सकी तब इस मांग को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन कलेक्टर श्री भार्गव ने थाना भवन के उद्घाटन अवसर पर उस समय मंत्री रहे डा प्रभूराम चौधरी के समझ आम जनता को सौगात देने के नाम पर नगर में केफेटेरिया भवन को सर्किट हाउस बनाने की घोषणा की थी परन्तु उनके स्थानांतरित होने के बाद वह घोषणा भी जैसे स्थानांतरित हो गई तब से अब तब लोग इंतजार करते रह गए परन्तु सर्किट हाउस की कलेक्टर की सौगात पर पलीता लग गया जबकि इस घोषणा से डा चौधरी भी खुश दिखाई दिये थे तथा अपने उद्बोधन मे कलेक्टर की इस घोषणा की प्रशंसा करते हुए कहा था कि अब कलेक्टर सा ने सर्किट हाउस की घोषणा कर नगर वासियों को सौगात दी परन्तु तब से अब तक न तो जिला प्रशासन ने ही न ही डा चौधरी ने ही इस सर्किट हाउस की घोषणा पर अमल करने कोई कदम आगे बढाये ।जिला प्रशासन को भी अपने ही जिला प्रमुख की घोषणा दरकिनार कर दिया ।लोगों को आज भी इस स्थल पर सर्किट हाउस की दरकार बनी हुई है।हालांकि रेशम केंद्र का तामझाम भी यहां से सिमट गया अब यह भूमि काफी समय से रिक्त पडी हुई है अनेक लोग रेशम केंद्र की भूमि पर ही सर्किट हाउस बनाने की चर्चा करते दिखाई देने लगे हैं

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