नसीम खान
सांची,,,,राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लालबहादुर शास्त्री की जयंती पर शुक्रवार को नगर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर दोनों महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर नगर में स्वच्छता अभियान चलाकर लोगों को स्वच्छता का संदेश दिया गया तथा नगर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने की शपथ दिलाई गई।
नगर परिषद परिसर में आयोजित कार्यक्रम में नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम, उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह राजपूत सहित पार्षदों ने महात्मा गांधी एवं लालबहादुर शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद नगर की सड़कों, गलियों, चौराहों, धार्मिक स्थलों सहित विभिन्न स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाया गया।
इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम ने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता को स्वस्थ और सशक्त समाज की बुनियाद माना था। उनका मानना था कि स्वच्छता केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। वहीं लालबहादुर शास्त्री ने सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और देशहित को अपने जीवन में सर्वोच्च स्थान दिया। दोनों महापुरुषों के विचार आज भी समाज और देश के लिए प्रेरणादायी हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से नगर को स्वच्छ रखने में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया। इसके बाद स्वच्छता बनाए रखने की शपथ दिलाई गई।
कांग्रेस कार्यालय में भी दी श्रद्धांजलि
नगर के बस स्टैंड स्थित कांग्रेस कार्यालय में भी महात्मा गांधी एवं लालबहादुर शास्त्री की जयंती मनाई गई। कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने दोनों महापुरुषों के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अंकित मेहतो ने दोनों महापुरुषों के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और मानवता के माध्यम से देश को स्वतंत्रता के आंदोलन में नई दिशा दी, जबकि लालबहादुर शास्त्री ने सादगी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ देश का नेतृत्व करते हुए ईमानदार सार्वजनिक जीवन की मिसाल कायम की। उन्होंने कहा कि दोनों महापुरुषों के विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता शकील पटेल, गोलू शर्मा, रवि अहिरवार सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे।
महापुरुषों को याद करने का सार यही है कि उनके विचार केवल समारोहों तक सीमित न रहें, बल्कि हमारे आचरण और दैनिक जीवन का हिस्सा बनें।





