नसीम खान
सांची,,, दीपों के महापर्व दीपावली के साथ ही पर्वों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। धनतेरस, दीपावली और छठ पूजा जैसे प्रमुख त्योहारों को लेकर नगर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। बाजार सज गए हैं और घरों में साफ-सफाई के साथ धार्मिक तैयारियां तेज हो गई हैं।
धनतेरस – आरोग्य और समृद्धि का पर्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाई जाती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था, जो आयुर्वेद के जनक और आरोग्य के देवता हैं। इसी दिन कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और नई वस्तु खरीदने से घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास होता है।
दीपावली – अंधकार पर प्रकाश की जीत
धनतेरस के दो दिन बाद दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। उनकी खुशी में अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाकर उनका स्वागत किया था। तब से यह पर्व अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से धन, वैभव और बुद्धि की प्राप्ति होती है।
छठ पूजा – सूर्य उपासना का महापर्व
दीपावली के ठीक छह दिन बाद छठ महापर्व मनाया जाता है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते और उगते दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि छठी मैया और भगवान सूर्य की पूजा से संतान सुख, आरोग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। बिहार, यूपी के साथ ही अब पूरे मध्यप्रदेश में भी यह पर्व बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाने लगा है।
नगर के पंडितों के अनुसार इस बार सभी त्योहार शुभ मुहूर्त में आ रहे हैं, जिससे बाजारों में भी विशेष रौनक है।





