पुलिस महकमे में नाम के एएसआई तनख्वाह मिल रही पुलिस आरक्षक के समान, वेतन भत्ते कीविसंगति ।

. वसीम कुरैशी की रिपोर्ट
रायसेन।पुलिस विभाग की वेतन एवं वेतन एवं भत्तों की विसंगतियों ने फिलहाल पुलिस अधिकारियों को भी उलझन में डाल रखा है।कहने को तो पुलिस अफसरों द्वारा उन्हें हेड कांस्टेबल से एएसआई पदों पर प्रमोशन देकर पदोन्नति दे दी गई।लेकिन उन्हें हर महीने वेतन पुलिस आरक्षक( सिपाही) के समान दी जा रही है।प्रदेश की शिवराज सरकार भी वेतन और उनके भत्ते विसंगति पर सहानूभूति पूर्वक विचार नहीं कर पा रही है।हालांकि इनके वेतन भत्तों की मांग लंबे समय से की जा रही है।लेकिन नतीजा अभी तक सिफर तक ही सीमित है।अपने हक, अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए हर विभाग एवं पार्टी संगठन के लोग सड़कों पर उतरकर धरना प्रदर्शन कर आएदिन अफसरों मंत्रियों सांसद विधायकों ज्ञापन सौंप रहे हैं।लेकिन पुलिस विभाग ऐसा हैं, जहां चाहकर भीअनुशासित आचरण के चलतेअपनी जायज मांगों को अधिकारियों और सरकार तक नहीं पहुंचा पाते।मजबूरी में ये वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से मांग पत्र मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का कार्य करते हैं।जिसका परिणाम यह है कि रायसेन जिले सहित प्रदेश में कई पुलिस कर्मी, पुलिस अधिकारी वेतन विसंगति और भत्ते विसंगति की मार झेलने के लिए विवश हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक पुलिस विभाग में कार्यरत अधिकारी कर्मचारीहमेशा जनता की सेवा में महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।लेकिन भरपूर मेहनत के बावजूद इन्हें नाममात्र का भत्ता दिया जा रहा है।जबकि गृह विभाग के 1 सितंबर 2007 मध्यप्रदेश पुलिस के निरीक्षक,उपनिरीक्षक एवं समकक्ष पदों की वेतन विसंगति दूर की जाकर सभी को रैंक सभी को यूनिफार्म के साथ वेतन, भत्ते की बात कही गई थी।लेकिन उक्त आदेश होंने के बाद भीउनके साथ शिवराज सरकार सौतेला व्यवहार क्यों कर रही है।
बताया जाता है कि पीएचक्यू भोपाल सहित जिलों में तैनात मिनिस्ट्रियल स्टाफ के 3500 से ज्यादा एएसआई और एसआई को 1900 ग्रेड पे मिल रहा है।इस पद पर जनरल ड्यूटी के एएसआई और सब इंस्पेक्टर को 3600 ग्रेड पे की हर महीने सुविधा मिल रही है।पुलिस स्टाफ में इनकी वेतन, भत्तों की विसंगति की समस्या लंबे समय से बनीं हुई है।यही वजह है कि चुनावी साल में सभी शासन से निराकरण चाहते हैं।ताकि पोस्ट के मान से सभी एक दायरे में आ जाएं।इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पत्र भेजे गए हैं।ताकि उनके वेतन और भत्ते विसंगति के मामले में सरकार सहानूभूति पूर्वक विचार कर लागू करे।

नसीम खान संपादक

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