नसीम खान
सांची,,,नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को पारंपरिक भुजरिया पर्व श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही पर्व को लेकर लोगों में उत्साह दिखाई दिया। महिलाओं ने घरों में तैयार की गई भुजरियों की पूजा-अर्चना की, वहीं परिवार के सदस्यों और परिचितों ने एक-दूसरे को भुजरिया भेंट कर पर्व की शुभकामनाएं दीं।
भुजरिया पर्व को विभिन्न अंचलों में लोकपरंपरा और सामाजिक मेल-मिलाप से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। कई क्षेत्रों में इसे कजलिया या भुजलिया के नाम से भी जाना जाता है। परंपरा के अनुसार लोग भुजरिया का आदान-प्रदान कर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और स्नेह प्रकट करते हैं। बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने की परंपरा भी इस पर्व का विशेष हिस्सा रही है।
नगर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्र गुलगांव ऐरन चिरोली बांसखेडा मढा मढवाई उचेर आमखेड़ा ढकना चपना सहित अन्य क्षेत्रों में भी लोगों ने पारंपरिक तरीके से भुजरिया पर्व मनाया। अनेक स्थानों पर भुजरियों को जलस्रोतों तक ले जाकर विसर्जित करने की परंपरा निभाई गई। पर्व के दौरान लोगों ने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे से मिलकर भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।
लोकमान्यता में भुजरिया पर्व का संबंध अच्छी वर्षा, फसल और सुख-समृद्धि की कामना से भी जोड़ा जाता है। वहीं अन्य कुछ अंचलों में इसकी परंपरा वीरगाथा आल्हा-ऊदल से भी जुड़ी मानी जाती है।
भुजरिया पर्व ने एक बार फिर लोकपरंपरा, आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।





