सांची में बिजली-पानी का ढर्रा भगवान भरोसे, जिम्मेदार अधिकारी बने बेखबरजनता परेशान, प्रशासन लापरवाह।

नसीमखान

सांची।
विश्वविख्यात ऐतिहासिक स्थल सांची इन दिनों भीषण गर्मी के साथ बिजली और जल संकट से जूझ रहा है। मूलभूत सुविधाओं के नाम पर बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। नगर की बिजली और पानी व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है, और जिम्मेदार अधिकारी महज एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़कर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।
नगर परिषद बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी के लिए विद्युत मंडल को दोषी ठहराता है, जबकि मंडल अधिकारी गर्मी में बढ़ते फाल्ट का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचते हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है — वो भी तब, जब हर माह जलकर और बिजली बिल समय पर चुकाया जाता है।
जलप्रदाय व्यवस्था हुई ठप, लोग हो रहे बेहाल।
नगर परिषद द्वारा जल सेवा के एवज में प्रतिमाह ₹150 जलकर वसूला जाता है, लेकिन इसके बावजूद नगरवासियों को महीने में मुश्किल से पंद्रह दिन ही जल आपूर्ति मिल पाती है — वह भी अनिश्चित समय पर। जब अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जाता है, तो जवाब मिलता है: “हम क्या करें, बिजली नहीं है।”
बिजली न होने की आड़ में जलप्रदाय व्यवस्था ठप हो गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी में पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है। कहीं मोटर नहीं चल रही, कहीं पाइपलाइन सूखी पड़ी है। नप अधिकारियों द्वारा बार-बार बिजली मंडल को सूचित करने का दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर कोई समाधान नजर नहीं आता।
बिजली की आँखमिचौली बनी आम बात।
बिजली की आवाजाही का कोई निश्चित समय नहीं है। कब आए, कब जाए — किसी को कुछ पता नहीं। विद्युत वितरण कंपनी की लापरवाही से नगर ही नहीं, सांची जैसे ऐतिहासिक पर्यटन स्थल की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। नियामक आयोग के आदेश भी महज़ कागज़ों तक सीमित नजर आते हैं।
बेतहाशा बढ़ते तापमान के बीच घंटों की बिजली कटौती ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार बिजली गुल रहने से जहां बीमार, बुजुर्ग और बच्चे परेशान हैं, वहीं जहरीले कीड़ों और सर्पदंश की घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है।
बिजली नहीं, बिल भारी भरकम।
हैरानी की बात तो यह है कि जहां जनता को बिजली मुश्किल से मिल रही है, वहीं उन्हें भारी-भरकम बिल थमाए जा रहे हैं। घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं दोनों को हजारों रुपये के बिल मिले हैं। इससे आम लोगों में आक्रोश पनप रहा है और अब लोग आंदोलन की तैयारी में हैं।
जनता का कहना है कि “बिजली नहीं, सुविधा नहीं — फिर भी बिल क्यों?” यह सवाल अब जोर पकड़ता जा रहा है और विद्युत विभाग के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
जिम्मेदारो का जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना जारी।
जब नगर परिषद सीएमओ से बात की गई, तो उन्होंने कहा, “बिजली नहीं होने के कारण जलप्रदाय प्रभावित हो रहा है। हम विद्युत मंडल को लगातार अनुरोध कर रहे हैं।”
वहीं विद्युत विभाग के जेई का कहना है कि “तापमान अधिक होने के कारण फाल्ट ज्यादा हो रहे हैं और तेज हवा से लाइनें टूट जाती हैं, जिससे बिजली बंद करनी पड़ती है।” बिलों को लेकर उन्होंने कहा कि “बढ़ी हुई खपत के अनुसार ही बिल दिए गए हैं।”
ऐसे हालात में यह सवाल उठना लाज़मी है कि जब जनता समय पर टैक्स और बिल चुकाती है, तो फिर मूलभूत सुविधाओं के लिए उसे क्यों तरसना पड़ रहा है? प्रशासनिक तंत्र की यह उदासीनता सांची जैसे विश्व धरोहर स्थल की गरिमा के लिए भी चिंता का विषय है।
अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन कब जागेगा और कब जनता को इस भीषण संकट से राहत मिलेगी।

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