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बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) शिक्षक भर्ती प्रश्नपत्र लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने इस बहुचर्चित मामले में शामिल आरोपी डॉ. मनीष कुमार को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि डॉ. मनीष मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जिले के निवासी हैं और वर्ष 2021 बैच के एमबीबीएस पासआउट हैं। कुछ समय पहले तक वे सरकारी डॉक्टर के रूप में कार्यरत थे, लेकिन नौकरी छोड़कर नीट पीजी की तैयारी कर रहे थे।
ED की जांच में सामने आए अहम तथ्य
जांच एजेंसी के अनुसार, डॉ. मनीष कुमार का संबंध पेपर लीक गिरोह के प्रमुख सदस्यों से पाया गया है। जांच में सामने आया है कि उनकी लोकेशन पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपियों के साथ मिली थी। इसके बाद एजेंसी ने तकनीकी साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया।
सूत्रों के अनुसार, डॉ. मनीष और इस गिरोह के अन्य सदस्य पहले भी एक-दूसरे के संपर्क में रहे हैं। जांच एजेंसियां उनके बैंक खातों और आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल कर रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि अपराध से अर्जित संपत्तियों को जल्द जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
30 अभ्यर्थियों से 1 करोड़ 20 लाख रुपये वसूले गए
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि 15 मार्च 2024 को आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा से पहले लगभग 30 अभ्यर्थियों को पटना के एक होटल में ठहराया गया था। इन अभ्यर्थियों से कथित तौर पर
कुल 1 करोड़ 20 लाख रुपये वसूले गए थे।
जानकारी के मुताबिक, प्रत्येक अभ्यर्थी से करीब 50 हजार रुपये की दर से कमीशन तय किया गया था। बताया जा रहा है कि गिरोह ने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर बड़ी रकम वसूली थी।
होटल पर छापेमारी के दौरान बच निकला था आरोपी
14 मार्च को पटना के एक होटल में की गई छापेमारी के दौरान 150 से अधिक अभ्यर्थियों को पकड़ा गया था। हालांकि, उस समय डॉ. मनीष वहां से फरार होने में सफल रहा था। लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी, जिसके बाद अब ED ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।
पेपर लीक का संगठित नेटवर्क
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है। मामले में पहले भी कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और कई मुख्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। एजेंसियां उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
पेपर लीक गिरोह की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाता था। इसके लिए आधुनिक तकनीकों और सुनियोजित नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता था।
जांच अभी जारी
ED ने संकेत दिए हैं कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एजेंसी आर्थिक पहलुओं की भी गहन जांच कर रही है। यदि अवैध कमाई के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आरोपियों की संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।





