नसीम खान
सांची – पवित्र श्रावण मास के सोमवार पर सांची नगरी शिवमय हो गई। भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही नगर के अधिकांश मंदिरों में भक्तों की खासी भीड़ देखने को मिली। हर-हर महादेव के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठे।
सुबह से शुरू हुआ सिलसिला।
सावन के सोमवार को लेकर श्रद्धालुओं में सुबह से ही खासा उत्साह था। 4 बजे से ही लोग स्नान कर सफेद वस्त्रों में मंदिरों की ओर निकल पड़े। स्तूप चौराहे पर स्थित प्रसिद्ध शिवमंदिर में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का दौर देर शाम तक चलता रहा।
मंदिर परिसर में बच्चों, महिलाओं और पुरुषों का जमावड़ा दिखाई दिया। भक्तों ने शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, गंगाजल और बेलपत्र चढ़ाकर मनोकामनाएं मांगीं। कई जगहों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से शिव चालीसा और “ॐ नमः शिवाय” का जाप भी किया।
श्रावण सोमवार का महत्व
पौराणिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए श्रावण मास में कठोर व्रत किया था। इसलिए कुंवारी कन्याएं योग्य वर और सुहागिनें पति की दीर्घायु के लिए श्रावण सोमवार का व्रत रखती हैं।
पूजा विधि और नियम
पंडितों के अनुसार श्रावण सोमवार को सुबह स्नान के बाद शिवलिंग का जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करने का विधान है। दिनभर फलाहार व्रत रखकर शाम को दीप जलाकर पूजा करने से विशेष फल मिलता है। इस दिन क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह भी दी जाती है।
स्थानीय प्रशासन ने मंदिरों के आसपास सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए थे। स्तूप चौराहे सहित अन्य शिवालयों में भक्तों को पंक्तिबद्ध करवाकर दर्शन करवाए गए।
भक्तों का कहना है कि सांची की शांत और आध्यात्मिक भूमि पर श्रावण सोमवार की पूजा का अनुभव और भी मंगलकारी हो जाता है।





