रिपोर्ट : नाजिर अली |Live khabar india
विदिशा। विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के अवसर पर अदाणी फाउंडेशन द्वारा संचालित परियोजना के अंतर्गत विदिशा ब्लॉक के 104 आंगनवाड़ी केंद्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व 96 ग्रामों की सुपोषण संगिनियों ने किया, जिनके माध्यम से माताओं, परिवारों और समुदाय को स्तनपान के महत्व, मातृ एवं शिशु पोषण तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया।
विश्व स्तनपान सप्ताह का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और विकास के लिए स्तनपान को बढ़ावा देना तथा समाज में इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों पर अनेक जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान धात्री महिलाओं के लिए कुकिंग प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, फादर प्रॉमिस वॉल, स्तनपान से जुड़े मिथकों एवं भ्रांतियों पर चर्चा, एफजीडी (समूह चर्चा), सुपोषण संगिनी हेल्प डेस्क, फैमिली काउंसलिंग तथा परिवार एवं समुदाय स्तर पर जागरूकता रैलियां आयोजित की गईं। इन गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को शिशु के शुरुआती छह माह तक केवल स्तनपान कराने के लाभों की जानकारी दी गई।
अभियान के अंतर्गत ग्राम चिरोड़िया और ग्राम कछुआ में विशेष सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। यहां धात्री महिलाओं के लिए कुकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया तथा “स्वस्थ बच्चा, खुश मां” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए।

पुरस्कार वितरण कार्यक्रम अदाणी फाउंडेशन की एएसओ पूर्णिमा दुबे की उपस्थिति में संपन्न हुआ। उन्होंने प्रतिभागी महिलाओं को मातृ स्वास्थ्य, संतुलित आहार और शिशु पोषण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, सरपंच, सचिव और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
अदाणी फाउंडेशन की एएसओ पूर्णिमा दुबे के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्तनपान और पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान सभी हितग्राहियों को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए तथा स्वस्थ और पोषित समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।


अदाणी फाउंडेशन द्वारा किए गए इस प्रयास को ग्रामीण समुदायों में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और लोगों ने ऐसे जागरूकता अभियानों को नियमित रूप से जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।





