गरीबों के लिए चल रही जनकल्याण कारी योजना के बाद भी गंदगी खखूरने मजबूर महिला बच्चे।

नसीमखान
सांची,,, वैसे तो केंद्र हो अथवा राज्य सरकार सभी देश से गरीबी भगाने अनगिनत जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही हैं परंतु इन योजनाओं का लाभ गरीब तक कम अमीर गरीब बनकर उठाने में सबसे आगे खडे रहते है तथा गरीब को गरीबी का ही जीवन गुजारने मजबूर होना पडता है ।
जानकारी के अनुसार वैसे तो देश एवं प्रदेश से गरीबी दूर करने केंद्र अथवा राज्य सरकारे गरीबों के हितार्थ अनगिनत जनकल्याण कारी योजनाओं को क्रियान्वयन करते हुए जमीनी स्तर तक पहुंचाने की कवायद करती हैं तथा तमाम योजनाओं का लाभ गरीब तबके को देकर देश प्रदेश के गरीब मुक्त करने के प्रयास में जुटी रहती हैं परन्तु यह योजना गरीब तक पहुंचने से पहले ही दम तब तोड देती हैं जब इन गरीबों की योजना पर अमीर अमने प्रभाव के चलते अथवा भृष्टाचार की भेट चढने से पहले ही दम तोड़ देती हैं जिससे गरीबों की योजना पर अमीरों का डाका पड जाता है तथा गरीब गरीब ही बना रहता है तब उसे अपना एवं अपने परिवार का पेट भरने गिरे से गिरा काम करने पर मजबूर होना पडता है एवं गरीब शासन की योजनाओं से अछूते रह जाते है इसी कारण गरीब महिला एवं बच्चों को फटे कपडों की आढ से अपने शरीर को ढककर नगर भर की गंदगी से बदबू तो झेलते ही हैं साथ ही गंदगी के ढेरों से पन्नी बीनकर अपना गुजारा करने विवश होना पडता हैं इस पन्नी बीनने मे इन गरीबों के छोटे छोटे बच्चों को भी अपने माता पिता के गंदगी भरे कारोबार में हिस्सा बंटाने मजबूर होना पडता हैं यही हाल इस विख्यात नगर का भी है यहां आये दिन बाहर से महिलाएं एवं उनके छोटे छोटे बच्चे नगर भर की बदबूदार गंदगी से रोटी खखूरते दिखाई दे जाते है गंदगी के बोरे कंधों पर टांगें महिला बच्चे आसानी से दिख जाते है तब शासन की स्कूल चले अभियान की कल ई खुल जाती हैं तथा गरीबों मे निशुल्क वितरण होने वाले राशन की इन से दूरी बनी रहती हैं वैसे तो प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री आवास की खूब चर्चा देखने सुनने को मिलती हैं फिर भी इन्हें झोपड़ी में ही जीवन गुजारने विवश होना पडता है इन्हें देखकर लोगों मे चर्चा उठना शुरू हो जाती हैं कि सरकार अपनी ही गरीबों के हितार्थ एवं अस्तित्व में लाई गई योजनाओं की उच्चस्तरीय पडताल कराये तो कहना मुश्किल होता हैं कि अमीर अपने रसूख एवं प्रभाव के चलते गरीबों के हक पर डाका डाल रहे है तथा यह गरीब सभी योजना से मेहरूम बने हुए हैं एवं इन योजना के क्रियान्वयन में जुटे प्रशासन मे बैठे लोग भी खूब मलाई खा रहे हैं ।एवं इन गरीबों की जिंदगी गंदगी के बीच फंसकर रह गई हैं ।

  • editornaseem

    Related Posts

    बड़ी खबर :NEET विवाद की गूंज: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भेजा इस्तीफा, शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर उठे विवाद ने अब राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में नई बहस को जन्म दे दिया है। शिक्षा…

    शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े राहुल गांधी, बोले- ‘धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही होगा’

    Live Khabar India | नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    बड़ी खबर :NEET विवाद की गूंज: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भेजा इस्तीफा, शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

    बड़ी खबर :NEET विवाद की गूंज: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भेजा इस्तीफा, शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

    शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े राहुल गांधी, बोले- ‘धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही होगा’

    शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े राहुल गांधी, बोले- ‘धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही होगा’

    ईरान के खिलाफ खाड़ी देशों का बड़ा एक्शन! पश्चिम एशिया में बढ़ा महायुद्ध का खतरा

    ईरान के खिलाफ खाड़ी देशों का बड़ा एक्शन! पश्चिम एशिया में बढ़ा महायुद्ध का खतरा

    इंदौर को मिली विकास की नई उड़ान: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लवकुश चौराहे के लेवल-2 फ्लाईओवर की पहली लेन का किया लोकार्पण

    इंदौर को मिली विकास की नई उड़ान: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लवकुश चौराहे के लेवल-2 फ्लाईओवर की पहली लेन का किया लोकार्पण

    आखिर ऐसा क्या हुआ कि 26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा उपवास? क्या उनके इस फैसले से आंदोलन की दिशा बदलेगी?

    आखिर ऐसा क्या हुआ कि 26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा उपवास? क्या उनके इस फैसले से आंदोलन की दिशा बदलेगी?

    क्या खत्म हो जाएगा CJP का आंदोलन? सरकार से बातचीत के बाद छात्रों की अगली रणनीति पर सबकी नजर

    क्या खत्म हो जाएगा CJP का आंदोलन? सरकार से बातचीत के बाद छात्रों की अगली रणनीति पर सबकी नजर