नसीम खान
सांची,,,
देश की पहली सोलर सिटी कहलाने वाली विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगरी सांची में आज सोलर सिटी योजना पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। आलम यह है कि सामने नवरात्रि और दीपों का महापर्व दीपावली जैसे बड़े त्योहार हैं, लेकिन नगर आज भी अंधेरे में डूबा हुआ है। हालांकि नगर परिषद प्रशासन अपने स्तर पर नगर को रोशन करने जुटी हुई है।
जानकारी के अनुसार सांची को सोलर सिटी बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। दावा किया गया था कि यहां की हर गली, हर सड़क सोलर लाइट से रोशन होगी। इसके लिए नगर में जगह-जगह सड़क किनारे सोलर खंभे खड़े किए गए थे।
लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। आज नगर में कहीं भी सोलर से जलने वाली लाइट दिखाई नहीं देती। सड़कों के किनारे लगाए गए सोलर खंभे पूरी तरह तहस-नहस हो चुके हैं। कई खंभों की सोलर प्लेटें टूटी हैं, कई जगह बैटरियां गायब हैं और कई खंभे तो जर्जर होकर गिरने की कगार पर हैं। क ई सोलर खंबे महीनों पहले ही तहसनहस हो चुके है
सोलर के नाम पर नगर में अंधेरा पसरा है। ऐसे में जब पूरा देश नवरात्रि और दीपावली पर रोशनी के पर्व की तैयारी कर रहा है, सांची की जनता अंधेरे में त्योहार मनाने को मजबूर है। यहां तक कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर खडे आडे तिरछे खंबे भी रोशनी छोड़ चुके है
अब नगर को रोशन करने के लिए नगर परिषद प्रशासन को अपनी एलईडी लाइटों का सहारा लेना पड़ रहा है। नगर परिषद ही अपनी व्यवस्था से जैसे-तैसे नगर की सड़कों को रोशन करने में जुटी है।
नगरवासियों का कहना है कि सोलर सिटी के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। अगर समय रहते इन सोलर लाइटों का मेंटेनेंस किया जाता तो आज त्योहारों पर नगर जगमगाता। तथा नगर परिषद प्रशासन को बिजली भार से छुटकारा मिल पाता ।जिम्मेदारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि सांची की पहचान के अनुरूप नगर रोशन हो सके।





