नसीम खान
बढ़ती महंगाई ने त्योहारों की मिठास की फीकी, नगर अंधेरे में
सब्जी-दाल से लेकर किराया और दवाओं तक महंगाई की मार, मुख्य मार्ग की स्ट्रीट लाइटें भी पड़ीं बंद
सांची,,, लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। त्योहारों के अवसर पर जहां बाजारों में उत्साह और रौनक दिखाई देनी चाहिए, वहीं महंगाई के बढ़ते बोझ ने त्योहारों की मिठास को फीका कर दिया है। दूसरी ओर, त्योहारों के बीच भी नगर का मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई हिस्से अंधेरे की चपेट में हैं। इससे नगर की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, लगातार बढ़ती महंगाई का सीधा असर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। सब्जियों के दाम बढ़ने के साथ दाल, तेल, मसाले, मिठाई सहित खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी महसूस की जा रही है। ऐसे में आगामी त्योहारों, विशेषकर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन, को लेकर भी लोगों के सामने खर्च का दबाव बढ़ गया है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए त्योहारों पर जरूरी खरीदारी करना भी चुनौती बनता जा रहा है।
महंगाई का असर केवल खाद्य पदार्थों तक सीमित नहीं है। आवागमन का खर्च बढ़ने से किराए में भी वृद्धि हुई है, जबकि पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर परिवहन के साथ अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ रहा है। किसानों को भी बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दवाओं की बढ़ती कीमतों ने बीमारी से जूझ रहे परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे में आम आदमी के सामने सीमित आय में घर का खर्च चलाने के साथ त्योहार मनाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
इधर, त्योहारों के समय नगर की मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़कें और अन्य प्रमुख हिस्से अंधेरे में डूबे रहना भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नगर में कोई विशेष कार्यक्रम आयोजित होता है, तब स्ट्रीट लाइटें रोशन दिखाई देती हैं, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होते ही कई स्थानों पर फिर अंधेरा छा जाता है। इससे नगर की सुरक्षा और सुंदरता दोनों प्रभावित होती हैं।
सांची जैसे ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थल की सुंदरता को लेकर समय-समय पर बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रकाश व्यवस्था सहित कई मूलभूत व्यवस्थाएं अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देतीं। लगातार बारिश के चलते पहले ही नगर की कई व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होना स्थानीय रहवासियों के साथ यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी चिंता का विषय है।
अब सवाल यह है कि ऐतिहासिक एवं पर्यटन नगरी के कायाकल्प की बातें कब जमीनी हकीकत बनेंगी और नगरवासियों को महंगाई के साथ-साथ अंधेरे से भी कब राहत मिलेगी?




