बिजली संकट से तंग किसानों ने किया बिजली कार्यालय का घेराव, कर्मचारियों को बाहर निकाल लगाया ताला

नसीमखान
सांची,, बारिश थमने के बाद खेतों में पानी की जरूरत के चलते बिजली संकट से जूझ रहे किसानों का गुस्सा बुधवार को फूट पड़ा। आक्रोशित किसानों ने सांची स्थित बिजली कार्यालय का घेराव कर जमकर नारेबाजी की, कर्मचारियों को दफ्तर से बाहर निकाल दिया और कार्यालय में ताला जड़ दिया।
जानकारी के अनुसार, बांसखेड़ा, सरचंपा, चिरोली, ऐरन सहित कई गांवों के किसानों को इन दिनों अपनी धान और सोयाबीन की फसलों में सिंचाई के लिए बिजली की आवश्यकता है। लेकिन उन्हें दिनभर में केवल 5-6 घंटे ही बिजली मिल रही है, वह भी अनियमित। किसानों का आरोप है कि विद्युत मंडल द्वारा कनेक्शन के नाम पर पहले ही मनमानी राशि वसूली जाती है, फिर भी समय पर बिजली उपलब्ध नहीं कराई जाती।
किसानों का कहना है कि बारिश बंद होने के बाद खेत सूख रहे हैं और ऐसे समय में बिजली की आपूर्ति जरूरी है, लेकिन मंडल के अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी, जिससे किसानों का धैर्य जवाब दे गया।
कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों से जब किसानों ने जवाब मांगा तो कथित रूप से टालने वाला रवैया अपनाया गया, जिसके बाद किसान भड़क गए और सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल कर दफ्तर में ताला जड़ दिया।
सूचना मिलते ही बिजली विभाग के मंडल अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने किसानों को शांत करने का प्रयास किया और समझाइश दी कि बड़ी लाइन में बार-बार फॉल्ट आने के कारण आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसे ठीक किया जा रहा है।
इस संबंध में सांची विद्युत विभाग के जेई मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि “फॉल्ट के कारण बिजली आपूर्ति में बाधा आई थी, जिसे सुधार लिया गया है। हम स्वयं विभागीय टीम के साथ प्रभावित गांवों का दौरा करेंगे और किसानों को हर हाल में समय पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।”
कुछ किसानों ने बताया कि “हमने समय पर बिजली कनेक्शन लिया, बिल भी चुका रहे हैं, लेकिन जरूरत के वक्त बिजली गायब हो जाती है। फसल बर्बाद हो रही है, और अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं।”
एक अन्य किसान का कहना था, “अगर बिजली समय पर नहीं मिली तो हमें खेतों में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। खेती करना आसान नहीं रहा, ऊपर से यह लापरवाही हमारी मेहनत पर पानी फेर रही है।”
पुलिस की मध्यस्थता और अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसान शांत हुए और कार्यालय का ताला खोला गया। हालांकि किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

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