इस दीपावली ना दुकान हटने का डर, ना ही कर देने की जरूरत

नसीमखान


वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने किए जा रहे प्रयासों से खुश हैं फुटपाथ व रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वाले छोटे-छोटे व्यवसायी

रायसेन,
जिले में दीपोत्सव पर्व के लिए सजे शहर के बाजारों एवं ग्रामीण हाट बाजारों में फुटपाथ व रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाकर छोटे-छोटे व्यवसाय कर रहे लोग, शासन द्वारा वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों से बेहद खुश हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा भी पथ विक्रेताओं से मिट्टी के दीपक सहित अन्य सामग्री खरीदकर उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है। रायसेन में महामाया चौक पर सड़क किनारे मिट्टी के दीपक व अन्य पूजन सामग्री बेच रहीं भगवती बाई बताती हैं कि इस बार दीपावली पर सारी कमाई हमारे घर पहुँचेगी। नगर पालिका का कोई भी कर्मचारी मुझसे कर लेने नहीं आया है। हमारे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मुझ जैसे छोटे-छोटे कारीगरों, पथ विक्रेताओं के लिए कर मुक्त व्यापार करने की छूट दी है।
रायसेन में सागर तिराहे के पास सड़क किनारे दुकान लगाकर मिट्टी के दीपक और अन्य सामग्री बेच रहे सीताराम प्रजापति और उमेश प्रजापति भी इस बार बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि पहले यह डर लगा रहता था कि कहीं नगर पालिका का कर्मचारी आकर यहां से हटने के लिये न कह दे। ऊपर से शुल्क भी देना पड़ता था। लेकिन इस बार कोई चिंता नहीं है, हम स्वाभिमान के साथ अपना व्यवसाय कर रहे हैं। इसी प्रकार मिट्टी के दीपक बेच रहीं भूरिया बाई सरकार और जिला प्रशासन की सराहना करते हुए कहती हैं कि प्रदेश में जनकल्याणकारी सरकार है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने हम जैसे आर्थिक रूप से कमजोर शिल्पियों को छूट देकर बड़ा प्रोत्साहन दिया है। इससे हमारा मनोबल बढ़ा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वदेशी अपनाकर “वोकल फार लोकल“ को बढ़ावा देने के लिये किए गए आव्हान को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पूरी लगन और मेहनत से धरातल पर ला रही है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा दीपावली के अवसर पर रेहड़ी-पटरी व फुटपाथ पर मिट्टी के दीपक, दीप मालाएँ, धार्मिक प्रतीकों व अन्य पूजन सामग्री एवं सजावटी सामान बेचने वाले छोटे-छोटे कारीगरों को कर मुक्त व्यवसाय की छूट व उन्हें अन्य सुविधायें देने का निर्णय लिया गया है। इससे मिट्टी के दीपक बनाने वाले शिल्पियों के चाक ने गति पकड ली है। साथ ही अन्य शिल्पियों को भी प्रोत्साहन मिला है।

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