ऐतिहासिक पर्यटक स्थल लंबी दूरी की ट्रेन से महरूम ।यात्री परेशान।

नसीमखान सांची
सांची,,, वैसे तो इस विश्व ऐतिहासिक पर्यटक स्थल की पहचान ढाई हजार साल पुरानी ऐतिहासिकता अपने मैं समेटे हुए है पूर्व में इस स्थल को दूर दराज क्षेत्र को जोडने के लिए लंबी दूरी की यात्री ट्रेन के स्टापेज हुआ करते थे परंतु इस विख्यात स्थल से लंबी दूरी के स्टापेज कोराना से सुरक्षित रहने के लिए खत्म कर दिये गए जिन्हें आज तक शुरू नहीं किया जा सका जिसका खामियाजा न केवल नगर वासी बल्कि देशविदेश से आने वाले पर्यटक भी भोग रहे हैं ।इस ऐतिहासिक स्थल पर लंबी दूरी की ट्रेन स्टापेज की दरकार बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार यह स्थल एक विश्व विख्यात पर्यटक स्थल माना जाता है सरकारें इस स्थल को सुंदर स्वच्छ विकास का जामा पहनाने की कवायद में जुटी हुई है तथा लाखों करोड़ों रुपए इस नगर पर खर्च किए जा रहे है ताकि इस स्थल पर अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके जिससे इस स्थल पर बेरोजगार युवकों को रोजगार के अवसर बढ सके ।उल्लेखनीय हैं कि कोराना काल में लोगों सहित पर्यटकों को सुरक्षित रखने अनेक ट्रेन स्टापेज स्थगित कर दिये गए थे ।परन्तु कोराना काल गुजरे लंबा अरसा गुजर गया तब से रेलवे प्रशासन द्वारा इस स्थल को ट्रेन स्टापेज नही मिल सके ।जिसका प्रभाव देश विदेश से आने वाले पर्यटकों पर तो पड ही रहा है बल्कि इस स्थल से भोपाल विदिशा सहित दूर दराज शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को भी उठाना पड़ रहा है इसके साथ ही इस स्थल पर कारोबार करने वाले लंबी दूरी की यात्रा के लिए तरस गए है इतना ही नहीं इस स्थल से अपडाउनर्स भी अछूते नहीं रहे हालांकि अनेक बार ज्ञापन सौपें गए परन्तु निराशा ही हाथ लगी अनेक सांसद विधायक मंत्रियों केंद्रीय मंत्रियों तक ट्रेन स्टापेज की मांग की गई परन्तु इस विख्यात स्थल को स्टापेज नहीं मिल सके ।जबकि यह स्थल जिले भर का एक मात्र रेलवे स्टेशन माना जाता है यहां से जिले भर के यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा करनी होती थी अब लोगों को लंबी दूरी की यात्रा करने के लिए भोपाल विदिशा जैसे रेलवे स्टेशन पहुचने पर मजबूर होना पडता है तथा देश विदेश के पर्यटकों को भी विदिशा भोपाल रेलवे स्टेशन से आना जाना करना पड़ता है जिससे पर्यटकों के साथ किसी भी अनहोनी की आशंका बनी रहती हैं इससे पर्यटकों को यहां पहुंचने के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ता है हालांकि अनेक बार श्री लंका महाबोधि सोसायटी के प्रभारियों ने भी रेलवे को पत्र अथवा ज्ञापन सौंप कर मांग की बावजूद इसके ट्रेन स्टापेज नहीं मिल सके हालांकि कुछ पैसैजर ट्रेन के स्टापेज तो कर दिये गए आज भी लंबी दूरी की यात्री ट्रेन स्टापेज की दरकार यात्रियों को बनी हुई है जबकि इस विख्यात रेलवे स्टेशन को करोड़ों रुपए की लागत लगातार आधुनिकता का जामा पहनाया जा रहा है इससे न केवल रेलवे स्टेशन पर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी बल्कि रेलवे स्टेशन की सुंदरता में भी निखार आ जायेगा तथा इस स्थल के अनुरूप विस्तार होगा ।बावजूद इसके इस स्थल को इतना सब होने के बाद भी ट्रेन स्टापेज के बिना सूना पन बना रहेगा।

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