गुलगांव मार्ग ओवरब्रिज में गड्ढे, बाहर निकला सरिया।करोड़ों की लागत से बने ओवरब्रिज की गुणवत्ता पर सवाल, जिम्मेदार बने अनजान

नसीमखान खान सांची
सांची,,,
गुलगांव मार्ग पर रेलवे फाटक से निजात दिलाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित ओवरब्रिज अब स्वयं हादसों को न्योता देता नजर आ रहा है। निर्माण के महज तीन–चार वर्षों के भीतर ही ओवरब्रिज की सतह जगह-जगह से उखड़ने लगी है। कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जिनसे लोहे का सरिया बाहर निकल आया है, जो राहगीरों और वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन गया है।
जानकारी के अनुसार, ओवरब्रिज निर्माण से पूर्व गुलगांव मार्ग पर रेलवे फाटक होने के कारण लगभग 25 गांवों के लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता था। साथ ही उदयगिरि पर्यटक स्थल तक पहुंचने वाले देश-विदेशी पर्यटकों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी। इसी समस्या के समाधान के लिए रेलवे गेट पर ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया, जिससे ग्रामीणों, किसानों, पर्यटकों और भारी वाहनों को बड़ी राहत मिली।
हालांकि, ओवरब्रिज के शुरू होते ही उसकी देखरेख से संबंधित विभागों ने मानो मुंह मोड़ लिया। नतीजा यह है कि अल्प समय में ही निर्माण की घटिया गुणवत्ता उजागर होने लगी। गड्ढों के कारण दोपहिया व चारपहिया वाहनों के साथ-साथ तेज रफ्तार भारी वाहनों का संतुलन बिगड़ने का खतरा बना हुआ है।
चिंताजनक पहलू यह भी है कि ओवरब्रिज पर प्रकाश व्यवस्था लगभग न के बराबर है। कुछ समय पूर्व लगाई गई सोलर लाइटें भी थोड़े ही समय में अंधेरे में डूब गईं। रात के समय अंधेरे और गड्ढों के कारण इस ओवरब्रिज से गुजरना लोगों के लिए भय का कारण बन चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरब्रिज की जर्जर हालत की जानकारी संबंधित विभागों, रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन तक जरूर पहुंची होगी, लेकिन इसके बावजूद न मरम्मत की पहल की जा रही है और न ही जिम्मेदारी तय की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है—क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?
ओवरब्रिज की बदहाल स्थिति अब नगर में चर्चा का विषय बनी हुई है और समय रहते सुधार नहीं हुआ तो किसी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता।

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