पतझड़ की दस्तक: हरियाली से सूने होते पेड़, बदलता प्रकृति का रंगग्रीष्म ऋतु के आगमन के साथ झड़ने लगे पत्ते, छांव और हरियाली में आई कमी

नसीमखान सांची
सांची,,, ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में पतझड़ का असर साफ दिखाई देने लगा है। हरे-भरे पेड़ अब धीरे-धीरे अपने पत्तों का साथ छोड़ रहे हैं, जिससे चारों ओर हरियाली का अभाव नजर आने लगा है। जहां कुछ दिन पहले तक पेड़ों की घनी छांव और ताजगी वातावरण को सुकून देती थी, वहीं अब शाखाएं सूनी दिखाई देने लगी हैं।
जानकारों के अनुसार, यह प्रकृति का एक स्वाभाविक चक्र है। पतझड़ के दौरान पेड़ों से पत्ते झड़ना आगामी नई कोंपलों के आगमन का संकेत होता है। हालांकि इस समय पेड़ों के सूनेपन से वातावरण में उदासी सी महसूस होती है। हरे-भरे वृक्ष जहां एक ओर शुद्ध वायु और ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वहीं उनकी हरियाली पर्यावरण को जीवंत बनाए रखती है।
पतझड़ का प्रभाव जंगलों और पहाड़ियों पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। घने वन क्षेत्र अब विरल होते दिख रहे हैं और पहाड़ियों पर हरियाली की जगह काले पत्थर उभरने लगे हैं। पेड़-पौधे सूखी लकड़ी जैसे प्रतीत होने लगते हैं और छांव का अभाव लोगों को भी महसूस होने लगता है।
प्रकृति का यह परिवर्तन भले ही कुछ समय के लिए हरियाली को कम कर दे, लेकिन यही चक्र आगे चलकर नवजीवन और नई ऊर्जा का आधार भी बनता है।
पतझड़ की यह खामोशी दरअसल आने वाली नई हरियाली की आहट है।

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