नसीम खान
रायसेन,
जिले में फसल अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए नवागत कलेक्टर श्री रोहित सिसोनिया ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक किया जाए। साथ ही पराली के उचित प्रबंधन के लिए उपलब्ध वैकल्पिक उपायों एवं आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के प्रति किसानों को प्रोत्साहित किया जाए।
कलेक्टर श्री सिसोनिया के निर्देशानुसार कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी तथा मैदानी अमला गांवों में पहुंचकर किसानों से चर्चा कर रहे हैं। जिले में औबेदुल्लागंज, बाड़ी, बरेली, सांची, सिलवानी सहित अन्य विकासखंड में किसानों से संवाद कर उन्हें बताया जा रहा है कि खेतों में फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है तथा पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ खेतों में मौजूद मित्र कीट और सूक्ष्म जीवों को भी नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा आग लगने की घटनाओं से जन-धन एवं आसपास की फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
आधुनिक कृषि यंत्रों से पराली प्रबंधन को मिल रहा बढ़ावा
कलेक्टर श्री सिसोनिया के निर्देशों का सकारात्मक असर भी दिखाई देने लगा है। जिले में किसान अब पराली जलाने के बजाय उसके उचित प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों और वैकल्पिक उपायों को अपना रहे हैं। किसान खेतों से फसल अवशेष एकत्रित करने के लिए बेलर मशीन का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से बिना पराली जलाए अगली फसल की बोवनी करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। बेलर मशीन की सहायता से फसल अवशेषों को गठ्ठरों के रूप में एकत्रित किया जा सकता है, वहीं हैप्पी सीडर और सुपर सीडर की मदद से खेत में मौजूद फसल अवशेषों के बीच ही बोवनी करना संभव होता है। इससे पराली जलाने की आवश्यकता नहीं होती है और समय तथा संसाधनों की भी बचत होती है।





